अध्यात्म

Rishi Panchami 2026: ऋषि पंचमी व्रत का उद्यापन कैसे करें, ऋषि पंचमी उद्यापन विधि

Rishi Panchami Vrat Udyapan Vidhi 2026, ऋषि पंचमी व्रत का उद्यापन कैसे करें: ऋषि पंचमी व्रत का सनातन धर्म में बहुत महत्व है। आज ऋषि पंचमी है, यहां पढ़ें ऋषि पंचमी व्रत का उद्यापन कैसे करें, ऋषि पंचमी उद्यापन विधि।

Image

ऋषि पंचमी व्रत का उद्यापन कैसे करें

Rishi Panchami Vrat Udyapan Vidhi 2026, ऋषि पंचमी व्रत का उद्यापन कैसे करें: हर साल हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी के रूप में मनाया जाता है। ऋषि पंचमी का व्रत जाने-अनजाने में हुई गलती या पाप से मुक्ति के लिए किया जाता है। महिलाएं अनजाने में हुए रजस्वला दोष (मासिक धर्म से जुड़ी अशुद्धियों) और पापों से मुक्ति पाने के लिए ऋषि पंचमी का व्रत करती हैं। कई परिवारों में जब यह व्रत नियमित रूप से किया जाता है, तो कुछ वर्षों के बाद विधि-विधान से इसका उद्यापन भी किया जाता है।

2026 में ऋषि पंचमी 15 सितंबर को मनाई जा रही है। इस दिन सप्तऋषि और माता अरुंधती की पूजा करने की परंपरा है। उद्यापन का मतलब आसान भाषा में व्रत के संकल्प को श्रद्धा के साथ पूरा करना है। इसमें घर की क्षमता, परिवार की परंपरा और उपलब्ध साधनों के अनुसार पूजा और दान किया जा सकता है।

ऋषि पंचमी उद्यापन कब करें

सनातन धर्म के अनुसार ऋषि पंचमी का व्रत लगातार 7 वर्षों तक नियमित पूरा करने के बाद 7वें वर्ष में उद्यापन किया जा सकता है। लेकिन नियमानुसार ऋषि पंचमी वर्क का उद्यापन मासिक धर्म आना बंद होने के बाद करना उत्तम माना जाता है।

ऋषि पंचमी व्रत का उद्यापन कैसे करें

उद्यापन वाले दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा की जगह को अच्छी तरह साफ करें। एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर सप्तऋषियों और अरुंधती माता की स्थापना करें। परंपरा के अनुसार सात ऋषियों के साथ अरुंधती का पूजन किया जाता है।

सप्तऋषियों के नाम लेकर संकल्प करें कि आप अपने किए गए व्रत का उद्यापन श्रद्धा से कर रहे हैं। इसके बाद जल, चंदन, अक्षत, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। चाहें तो पंचामृत से अभिषेक भी कर सकते हैं।

ऋषि पंचमी उद्यापन विधि

पूजा के दौरान कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ ऋषि का स्मरण करें। साथ ही अरुंधती माता को भी पूजा में शामिल करें। व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में आरती करें।

इसके बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार सात ब्राह्मणों को भोजन कराने की परंपरा कई जगह मिलती है। उद्यापन के भोजन में घर का बना सात्विक भोजन रखा जा सकता है। खीर, पूरी, सब्जी, फल या अन्य शुद्ध भोजन श्रद्धा से परोसा जाता है। इसके साथ यथाशक्ति वस्त्र और दक्षिणा दी जा सकती है। पूजा पूरी होने के बाद सप्तऋषियों से जाने-अनजाने हुई भूल के लिए क्षमा मांगें।

Avni Bagrola
अवनी बागरोलाauthor

अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें जेन Z और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 3000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

और पढ़ें
End of Article