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राम मंदिर चढ़ावा मामला: क्या चंपत राय को मिल गई 'क्लीन चिट'? दान गबन मामले में दर्ज FIR में नाम नहीं

राम मंदिर से जुड़ी किसी भी बड़ी घोषणा या प्रशासनिक फैसले के दौरान ट्रस्ट का सबसे प्रमुख सार्वजनिक चेहरा चंपत राय रहे। वह ट्रस्ट के महासचिव हैं, ऐसे में मंदिर में यदि कोई अनैतिक कार्य होता है तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी भी उनकी बनती है। लोगों का कहना है कि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव के तौर पर चंपत राय इतने महत्वपूर्ण पद पर हैं।

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श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव चंपत राय।

Photo : PTI

Champat Rai News: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो गई है। इनमें चढ़ावे एवं कैश की गिनती से जुड़े लोग शामिल हैं। हालांकि, राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम प्राथमिकी में शामिल नहीं है जिससे सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार दान गबन मामले में 'बड़ी मछलियों' को बचा रही है। इसे चंपत राय को 'क्लीन चिट' देने के रूप में भी देखा जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि 'बड़े लोगों' का नाम इस गबन में न आए इसलिए छोटे स्तर के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस पूरे मामले में चंपत राय यदि सवालों के घेरे में आए हैं तो इसकी भी वजह है।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव हैं चंपत राय

दरअसल, राम मंदिर का निर्माण कार्य जब से शुरू हुआ, चंपत राय तभी से सुर्खियों में रहने लगे। ट्रस्ट का महासचिव होने के साथ-साथ वह विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष भी हैं। मंदिर निर्माण परियोजना की निगरानी, दान और चढ़ावे से जुड़े प्रबंधन, ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक संवाद, बैठकों के समन्वय और विभिन्न एजेंसियों के साथ तालमेल की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उन्हीं के पास है। ट्रस्ट के सदस्यों में सबसे ज्यादा उन्हीं की भूमिका रही है। राम मंदिर से जुड़ी किसी भी बड़ी घोषणा या प्रशासनिक फैसले के दौरान ट्रस्ट का सबसे प्रमुख सार्वजनिक चेहरा चंपत राय रहे हैं। राय ट्रस्ट के महासचिव हैं, ऐसे में मंदिर में यदि कोई अनैतिक कार्य होता है तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी भी उनकी बनती है।

गबन की जानकारी न हो लोगों को नहीं हो रहा विश्वास

लोगों का कहना है कि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव के तौर पर चंपत राय इतने केंद्रीय पद पर हैं कि उनकी जानकारी के बिना किसी बड़े स्तर की गड़बड़ी होना मुश्किल है। मंदिर के कामकाज एवं प्रबंधन में उनके प्रभाव को देखते हुए लोगों को विश्वास नहीं हो रहा है कि इतनी बड़ी चोरी के बारे में उन्हें जानकारी न हो। हालांकि, इस चंदा चोरी माले में SIT ने बीते 16 जून को चंपत राय और गोपाल राव से चार-चार घंटे पूछताछ की। एसआईटी का कहना है कि इस पूछताछ में राय ने उनका पूरा सहयोग किया। उन्होंने शुरुआत में ही इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का सुझाव दिया था।

चंपत राय का ड्राइवर रह चुका है टिन्नू यादव

चंपत राय की भूमिका पर संदेह इसलिए भी है क्योंकि मामले में गिरफ्तार रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू उनका ड्राइवर रह चुका है। वह मंदिर के लगभग समस्त कार्यों में उसका सीधा दखल था। लोगों को लगता है कि चंपत राय से करीबी का फायदा टिन्नू उठाता होगा। यहां तक कि दानपात्रों की चाबियां भी इसी के पास पाई गईं। दान चोरी मामले के अलावा अयोध्या में जून 2021 में खरीदी गई जमीन को लेकर भी चंपत राय विवाद में आ चुके हैं। आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया था कि एक व्यक्ति ने जिस जमीन को दो करोड़ रुपये में खरीदा उसे इस सौदे के महज कुछ ही मिनटों बाद ट्रस्ट ने 18.5 करोड़ रुपए देकर खरीदा। चंपत राय ने उस समय भी अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया थ। राय ने आरोपों को भ्रामक और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया था।

चंपत की भूमिका पर सवाल उठाते रहे हैं अखिलेश, संजय सिंह

गुरुवार को लखनऊ में एसआईटी के समक्ष पेश हुए AAP के राज्यसभा सांसद संसद सिंह ने कहा कि उन्होंने एसआईटी को घोटाले से जुड़े दस्तावेज दिए। उन्होंने घोटाले में चंपत राय के शामिल होने का आरोप लगाया। यही नहीं सिंह ने दावा किया कि घोटाले में अनिल मिश्रा भी शामिल थे। सरकार ने घोटाले से ध्यान भटकाने के लिए कर्मचारियों पर एफआईआर कराई है। सही से जांच हुई होती तो इन जमीन घोटालेबाज और चंदा चोरों के खिलाफ कार्रवाई होनी तय थी। तो वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि चढ़ावा चोरी मामले में 'बड़ी मछलियों' को बचाया जा रहा है। X पर अपने एक ट्वीट में अखिलेश ने कहा कि SIT के बहाने सारे सबूत साफ किए गए और लगता है कि एसआईटी को रिपोर्ट पहले ही बनाकर दे दी गई हो।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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