भगवान राम सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में आस्था, संस्कृति और सभ्यता का महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई राष्ट्रों में राम की प्रतिमाएं, शिल्प और मंदिर आज भी उनकी विरासत को जीवित रखते हैं। यह फोटो स्टोरी उन देशों की झलक है, जहां भारत से दूर भी भगवान राम की उपस्थिति उतनी ही प्रभावशाली और सम्मानित है।
उत्तरी अमेरिका के ओंटारियो के मिसिसॉगा में हिंदू हेरिटेज सेंटर में भी भगवान राम की 51 फीट ऊंची प्रतिमा लगाई गई है। ओंटारियो के मिसिसॉगा में भगवान राम की प्रतिमा फाइबरग्लास से बनी है और इसका फ्रेम स्टील का है। यह ग्रेटर टोरंटो क्षेत्र में एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्थल के रूप में स्थापित है।
श्रीलंका के ‘रामायण ट्रेल’ स्थलों, मुन्नेश्वरम, त्रिंकोमाली और नुवारा एलिया में भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की प्रतिमाएं स्थापित हैं, जो पर्यटन और धार्मिक यात्राओं का बड़ा आकर्षण हैं।
थाईलैंड में ‘राम’ राष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अयुत्थया और बैंकॉक के कई मंदिरों में राम के स्वरूपों वाली मूर्तियां और शिल्प मौजूद हैं। वहीं, इंडोनेशिया के बाली और जावा में भगवान राम की मूर्तियां कई मंदिरों में दिखाई देती हैं। नेपाल के जनकपुर में, जहां सीता माता का जन्म माना जाता है, राम की कई प्रतिमाएं और शिल्प मौजूद हैं।
अयोध्या रामलला की प्रतिमा 51 इंच (4.24 फीट) ऊंची है। यह श्याम शिला (काले पत्थर) से बनी है और 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर में स्थापित की गई थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा में शुक्रवार को भगवान श्रीराम की 77 फीट ऊंची मूर्ति का अनावरण किया। इस मूर्ति की सबसे खास बात यह है कि इसे कांस्य (Bronze) की धातु से तैयार किया गया है। आइए जानते हैं कि भगवान राम की प्रतिमा भारत के अलावा और कहां-कहां है।
कंबोडिया के अंकोर वाट में रामायण के दृश्य तराशे गए विशाल शिल्प मिलते हैं। यहां भगवान राम की कई प्रतिमाएं और उकेरी गई आकृतियां खमेर साम्राज्य की धार्मिक विरासत को दर्शाती हैं।