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Ram Mandir Trust: 'सरकार नहीं कर सकती हस्तक्षेप, ट्रस्ट है स्वतंत्र निकाय', गृह मंत्रालय ने CIC को क्या-क्या बताया?

Ram Mandir Donation Row: राम मंदिर चंदा चोरी मामले के बीच केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने स्पष्ट किया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वतंत्र निकाय है और यह केंद्र या उत्तर प्रदेश सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं है। आयोग के मुताबिक, ट्रस्ट को सरकार से कोई वित्तीय सहायता या प्रशासनिक नियंत्रण प्राप्त नहीं है, इसलिए यह सूचना का अधिकार यानी आरटीआई अधिनियम के तहत 'पब्लिक अथॉरिटी' नहीं माना जाएगा।

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Ram Mandir Donation Row: राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है। AI IMAGE

Ram Mandir Donation Row: राम मंदिर चंदा चोरी मामले को लेकर नए-नए खुलासे हो रहे हैं। इसी बीच 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने जानकारी दी है कि राम मंदिर परिसर का प्रबंधन देखने वाला 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' एक पूर्णतः स्वतंत्र निकाय है और यह केंद्र या उत्तर प्रदेश सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय सूचना आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह ट्रस्ट आरटीआई (सूचना का अधिकार) अधिनियम के दायरे में नहीं आता है, क्योंकि सरकार का इस पर कोई प्रशासनिक या वित्तीय नियंत्रण नहीं है।

आरटीआई के जरिए क्या मिली जानकारी?

साल 2024 की शुरुआत में नीरज शर्मा नाम के एक व्यक्ति ने आरटीआई (RTI) के तहत केंद्र सरकार से राम मंदिर ट्रस्ट के जन सूचना अधिकारियों के नाम मांगे थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस अपील को खारिज कर दिया था। इसके बाद मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा, जिसने केंद्रीय सूचना आयोग को निर्देश दिया कि वह गृह मंत्रालय से जवाब मांगकर यह तय करे कि ट्रस्ट एक सार्वजनिक प्राधिकरण (Public Authority) है या एक स्वायत्त निकाय।

गृह मंत्रालय के जवाब का मूल्यांकन करने के बाद सूचना आयोग ने अपने अंतिम आदेश में कहा,"राम मंदिर ट्रस्ट सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गठित एक स्वतंत्र संगठन है। इसे राज्य या केंद्र सरकार से कोई वित्तीय सहायता या प्रशासनिक नियंत्रण प्राप्त नहीं है। इसलिए यह 'पब्लिक अथॉरिटी' नहीं है और इसकी कार्यप्रणाली आरटीआई एक्ट के दायरे में नहीं आएगी।"

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राम मंदिर ट्रस्ट सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गठित एक स्वतंत्र संगठन।

किसके पास चंपत राय या अनिल मिश्रा को बर्खास्त करने का अधिकार?

चूंकि ट्रस्ट पूरी तरह से एक स्व-संचालित निकाय है, इसलिए देश की किसी भी वैधानिक या सरकारी संस्था के पास चंपत राय या अनिल मिश्रा को पद से बर्खास्त करने की शक्ति नहीं है। उनके भविष्य का फैसला केवल ट्रस्ट के स्थायी सदस्य ही आपस में सर्वसम्मति से कर सकते हैं।

राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व की क्या है भूमिका?

हालांकि ट्रस्ट के 15 सदस्यों में केंद्र और राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले 4 आईएएस अधिकारी (जैसे गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रशांत लोखंडे और यूपी के एसीएस होम संजय प्रसाद) भी शामिल हैं, लेकिन उनके पास कोई निर्णय लेने या वोट देने का अधिकार नहीं है। वे केवल पदेन सदस्य हैं। ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक, किसी भी सदस्य को जबरन निष्कासित करने का कोई प्रावधान या ढांचा नहीं है। अगर कोई बदलाव होना है, तो उसका एकमात्र रास्ता केवल 'इस्तीफा' है।

वर्तमान में 15 सदस्यों में से एक (कामेश्वर चौपाल) के निधन के बाद उनकी जगह कृष्ण मोहन को शामिल किया गया है, जबकि विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा के निधन के बाद एक सीट अभी भी खाली है। चंपत राय और अनिल मिश्रा को मिलाकर बचे हुए 10 वोटिंग सदस्यों में से कम से कम 6 सदस्यों की आम सहमति होना किसी भी बड़े फैसले के लिए जरूरी है।

मंदिर के आंतरिक मामलों से जुड़े एक सूत्र ने बताया,"भले ही चंपत राय महासचिव पद छोड़ दें, फिर भी उन्हें सदस्य बने रहने का अधिकार है। इसी तरह अनिल मिश्रा को भी उनके दायित्वों से मुक्त किया जा सकता है और वे ट्रस्ट से जुड़े रह सकते हैं। अभी तक हमें किसी ऐसे ढांचे के बारे में जानकारी नहीं मिली है जिसके तहत किसी सदस्य को निष्कासित किया जा सके, इसलिए एकमात्र रास्ता इस्तीफा देना ही है। ट्रस्ट के सदस्य वर्तमान संरचना में पूर्ण परिवर्तन की आवश्यकता होने पर आगे की रणनीति पर भी चर्चा कर सकते हैं। जो सदस्य व्यक्तिगत रूप से बैठक में शामिल नहीं हो सकते, वे वर्चुअल माध्यम से जुड़ सकते हैं, क्योंकि ट्रस्ट का आईटी विभाग सभी सदस्यों को पहले से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक उपलब्ध करा देता है।

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रकारी संस्था के पास चंपत राय या अनिल मिश्रा को पद से बर्खास्त करने की शक्ति नही।

ट्रस्ट की पिछली बैठक कब हुई थी?

महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा करने के लिए ट्रस्ट की बैठक हर तीन महीने में बुलाई जाती है, और पिछली बैठक 21 मार्च को हुई थी, जिसका मुख्य एजेंडा राम नवमी की तैयारियां थीं। जनवरी 2021 से राम मंदिर के निर्माण कार्य की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपे गए कर्नाटक के वरिष्ठ विश्व हिंदू परिषद पदाधिकारी गोपाल नागरकट्टे (राव) को ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्यों में शामिल किया गया है। ट्रस्ट ने यह घोषणा नहीं की कि उन्हें कब नियुक्त किया गया था। चंपत राय और अनिल मिश्रा के बाद राव तीसरे ऐसे व्यक्ति हैं जिन पर इस समय सवाल उठ रहे हैं। राम मंदिर निर्माण के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2019 के आदेश के अनुसार, इस ट्रस्ट की स्थापना फरवरी 2020 में हुई थी।

ट्रस्ट की पहली बैठक दिल्ली में हुई, जिसमें महंत नृत्य गोपाल दास को अध्यक्ष चुना गया, जबकि विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष राय को महासचिव और गोविंद गिरि देव को कोषाध्यक्ष बनाया गया। उत्तर प्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव, निरपेंद्र मिश्रा को निर्माण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

    ट्रस्ट से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां

    • राम मंदिर ट्रस्ट की बनावट और कामकाज को देखें तो सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष की जीत तय कराने वाले वरिष्ठ वकील के. परासरन इसके बेहद महत्वपूर्ण सदस्य हैं और दिल्ली में बना उनका घर ही इस ट्रस्ट का रजिस्टर्ड पता है।
    • ट्रस्ट के अन्य प्रमुख सदस्यों में प्रयागराज के स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, उडुपी के स्वामी विश्वप्रसन्नातीर्थ, हरिद्वार के युगपुरुष परमानंद गिरि और निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास शामिल हैं।
    • समय के साथ ट्रस्ट में कुछ बदलाव भी हुए हैं; जैसे दलित समुदाय के प्रतिनिधि कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद आरएसएस कार्यकर्ता कृष्ण मोहन को सदस्य बनाया गया, जबकि अयोध्या राजपरिवार के विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा के निधन के बाद उनका पद अभी तक खाली है।
    • इनके अलावा नृपेंद्र मिश्रा और तीन आईएएस अधिकारी, प्रशांत लोखंडे (केंद्र सरकार के प्रतिनिधि), संजय प्रसाद (यूपी सरकार के प्रतिनिधि) और शशांक त्रिपाठी (अयोध्या के डीएम) भी ट्रस्ट का हिस्सा हैं, लेकिन इन सरकारी अधिकारियों को ट्रस्ट के फैसलों में वोट देने का कोई अधिकार नहीं है।
    • वहीं, आरएसएस के सुरेश भैया जोशी और वीएचपी के दिनेश चंद्र जैसे बड़े चेहरे आमंत्रित सदस्य के रूप में बैठकों में आते हैं, जिन्हें वोटिंग का अधिकार तो नहीं है पर वे कामकाज सुधारने के लिए अपनी सलाह दे सकते हैं।
    • प्रशासनिक शक्तियों और मंदिर के कामकाज की बात करें तो अगस्त 2020 में निर्माण शुरू होने के बाद से महासचिव चंपत राय ही सबसे प्रमुख फैसले ले रहे थे और डॉ. अनिल मिश्रा प्रशासनिक मुखिया के तौर पर काम देख रहे थे।
    • वहीं, गोपाल नागरकट्टे मंदिर के निर्माण कार्य के प्रभारी हैं। हालांकि हालिया विवाद के बाद से चंपत राय और अनिल मिश्रा मंदिर परिसर में नजर नहीं आए हैं, लेकिन नागरकट्टे लगातार काम की देखरेख कर रहे हैं।

    वीआईपी पास जारी करने की ताकत किन लोगों के पास?

    दिलचस्प बात यह है कि पूरे ट्रस्ट में आरती और वीआईपी पास जारी करने जैसी मुख्य प्रशासनिक ताकतें केवल चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल नागरकट्टे के पास ही केंद्रित हैं, जिसकी वजह से बाकी पदाधिकारी बहुत सहज नहीं हैं क्योंकि उनकी भूमिकाएं काफी सीमित हो गई हैं। भविष्य में यदि ट्रस्ट में कोई नया सदस्य शामिल करना हो, तो उसके लिए किसी बाहरी दखल की गुंजाइश नहीं है; वह केवल वर्तमान स्थायी सदस्यों के बहुमत के फैसले से ही चुना जा सकता है।

    Piyush Kumar
    पीयूष कुमारauthor

    पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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