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महिलाओं के लिए पुलिस में 33 प्रतिशत आरक्षण, इस राज्य सरकार ने दे दी मंजूरी

Reservation for Women: राजस्थान सरकार ने पुलिस में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दी। इससे जुड़ी जानकारी उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा ने दी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कई अहम परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। आपको बताते हैं कि इसमें क्या कुछ खास है।

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फाइल फोटो।

Rajasthan News: राजस्थान मंत्रिमंडल ने पुलिस बल में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी एक प्रस्ताव को बुधवार को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पेंशनभोगियों को पांच प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता दिए जाने तथा 3,150 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटित किए जाने को भी मंजूरी दी गई।

पुलिस बल में महिलाओं की न्यूनतम 33 प्रतिशत भर्ती

बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा ने बताया, 'विधानसभा चुनाव से पहले "आपणो अग्रणी राजस्थान संकल्प पत्र-2023" में हमने महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिस बल में महिलाओं की न्यूनतम 33 प्रतिशत भर्ती करने का वादा किया था।' उन्होंने कहा कि इसी संबंध में आज मंत्रिमंडल की बैठक में राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा नियम, 1989 में संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया तथा कार्मिक विभाग इस बारे में शीघ्र अधिसूचना जारी करेगा।

बैरवा ने कहा कि इस फैसले से राज्य में महिलाओं को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध हो सकेंगे और राजस्थान पुलिस में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि साथ ही, महिलाओं से जुड़े मामलों में पुलिस और अधिक संवेदनशीलता के साथ काम कर सकेगी।

सरकारी कर्मचारियों के लिए लिया गया अहम फैसला

बैरवा ने बताया, 'मंत्रिमण्डल ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के हित में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राज्य सरकार के कार्मिकों की सेवानिवृत्ति पर अन्य पात्र सदस्य के नहीं होने पर स्थायी रूप से दिव्यांग बच्चों, आश्रित माता-पिता और दिव्यांग भाई-बहनों का नाम भी पेंशन पेमेंट ऑर्डर (पीपीओ) में जोड़ा जा सकेगा।' उन्होंने कहा कि इसके लिए केन्द्र सरकार के पेंशन नियमों के अनुरूप ही राजस्थान सिविल सेवा पेंशन नियम, 1996 के नियम 67 एवं 87 में संशोधन किए जाने को मंजूरी प्रदान की गई है।

1996 के नियम 54बी को प्रतिस्थापित किए जाने की मंजूरी

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री शर्मा ने विधानसभा में राजस्थान विनियोग एवं वित्त विधेयक पर चर्चा के दौरान पेंशनर को राहत देते हुए 70 से 75 वर्ष के पेंशनर एवं पारिवारिक पेंशनर के लिए पांच प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता दिए जाने की घोषणा की थी।

उन्होंने कहा कि इस क्रम में राजस्थान सिविल सेवा पेंशन नियम, 1996 के नियम 54बी को प्रतिस्थापित किए जाने की मंजूरी भी आज प्रदान की गई। विधि एवं न्याय मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि आज की बैठक में 3,150 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन की स्वीकृतियां प्रदान की गईं। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे एवं राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी होगी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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