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हाथरस हादसे को लेकर राहुल गांधी ने सीएम योगी को लिखी चिट्ठी, की ये मांग

Rahul Gandhi wrote a letter to CM Yogi: राहुल गांधी ने सीएम योगी को पत्र लिखकर कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जो मुआवजा घोषित किया गया है, वह बहुत अपर्याप्त है। मेरा आग्रह है कि मुआवजे की राशि बढ़ाई जाए और उसे जल्द से जल्द दिया जाए। साथ ही घायलों का समुचित इलाज कराया जाए और उन्हें भी उचित मुआवजा दिया जाए।

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Rahul Gandhi

Photo : Twitter

Rahul Gandhi wrote a letter to CM Yogi: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हाथरस हादसे को लेकर रविवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने यूपी सरकार से पीड़ित के परिजनों को मुआवजा राशि बढ़ाने और जल्द से जल्द प्रदान करने का आग्रह किया। इसके साथ ही राहुल गांधी ने पत्र के माध्यम से सीएम योगी को पीड़ित परिजनों की समस्याएं भी बताईं।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री को लिखे पत्र को भी शेयर करते हुए लिखा, ''हाथरस में भगदड़ हादसे से प्रभावित पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर, उनका दुख महसूस कर और समस्याएं जान कर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र के माध्यम से उनसे अवगत कराया। मुख्यमंत्री से मुआवजे की राशि को बढ़ाकर शोकाकुल परिवारों को जल्द से जल्द प्रदान करने का आग्रह किया। इस दुख की घड़ी में उन्हें हमारी सामूहिक संवेदना और सहायता की आवश्यकता है।

'मेरे पास सांत्वना के शब्द कम पड़ गए'

उन्होंने पत्र में लिखा, ''हाथरस में हुई भगदड़ की दुर्घटना में 120 से अधिक लोगों की मृत्यु के समाचार से स्तब्ध हूं। हृदय में पीड़ा के साथ आपको यह पत्र लिख रहा हूं और यह जानता हूं कि आप भी यही पीड़ा महसूस कर रहे होंगे। कल सुबह जनपद अलीगढ़ और हाथरस के कई पीड़ित परिवारों से मैंने मुलाकात की और उनका दर्द साझा करने की कोशिश की। हादसा इतना दुखद है कि परिजनों से मिलते समय मेरे पास सांत्वना के शब्द भी कम पड़ गए। अनेक परिवारों ने इस दुर्घटना में अपना जो कुछ भी खोया है, उसकी पूर्ति तो किसी भी प्रकार से सम्भव नहीं है परंतु प्रभावित परिवारों की हर संभव सहायता करके हम उनका दुख कम करने का प्रयास अवश्य कर सकते हैं।''

बढ़ाई जाए मुआवजे की राशि

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आगे लिखा, ''उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जो मुआवजा घोषित किया गया है, वह बहुत अपर्याप्त है। मेरा आग्रह है कि मुआवजे की राशि बढ़ाई जाए और उसे जल्द से जल्द दिया जाए। साथ ही घायलों का समुचित इलाज कराया जाए और उन्हें भी उचित मुआवजा दिया जाए। पीड़ित परिवारों ने मुझसे यह भी साझा किया कि इस पूरे हादसे के लिए जिम्मेदार वहां के स्थानीय प्रशासन की लापरवाही और संवेदनहीनता है। इस मामले में उचित एवं पारदर्शी जांच न सिर्फ आने वाले समय में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने की तरफ एक सही कदम होगा, बल्कि इससे इन पीड़ित परिवारों के मन में न्याय-व्यवस्था के प्रति विश्वास भी पुनर्स्थापित होगा। न्याय की दृष्टि से यह भी आवश्यक है कि दोषी व्यक्तियों को कठोर सजा दी जाए। दुख की इस घड़ी में हम सभी की ज़िम्मेदारी है कि पीड़ित परिवारों का साथ दें। इस मामले में आपके हर संभव सहयोग के लिए कांग्रेस पार्टी के समस्त कार्यकर्ता एवं मैं स्वयं उपलब्ध हूं। उम्मीद है इस पूरे मामले की गंभीरता देखते हुए, आप सहायता के संदर्भ में किए जाने वाले कार्यों को विशेष प्राथमिकता प्रदान करेंगे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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