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ट्रेंड में राहुल गांधी की हॉफ T-Shirt ,क्या कम ठंड का इस प्रोटीन से है रिश्ता

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Dec 28, 2022, 01:02 PM IST

Rahul Gandhi on T Shirt: नेशलन लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में छपी रिपोर्ट के अनुसार जिन लोगों के मसल में एल्फा एक्टिनिक 3 नाम का प्रोटीन कम होता है, उन लोगों में ठंड झेलने की शक्ति बाकी लोगों से बेहतर होती है। दुनिया में इस तरह के 150 करोड़ लोग हैं, जिनमें एल्फा एक्टिनिक 3 प्रोटीन की कमी पाई जाती है।

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राहुल गांधी

Rahul Gandhi on T Shirt:कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर ठंड और टी शर्ट कनेक्शन पर बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि फिलहाल टी-शर्ट ही चल रही है और जब तक चल रही है चलेगी। असल में दिल्ली में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इसके बावजूद राहुल गांधी दिल्ली पहुंची भारत जोड़ो यात्रा में बिना स्वेटर और जैकेट के नजर आ रहे हैं। वह पिछले दिनों हॉफ टी-शर्ट पहने हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी के समाधि स्थल पहुंचे। ऐसे में उनकी टी शर्ट सोशल मीडिया से लेकर राजनीति का चर्चा बन गई है।

कोई योगी तो कोई तपस्वी बता रहा है

राहलु गांधी के इस नए रूप पर कांग्रेस नेता रिया चौधरी उनकी तस्वीर शेयर कर उन्हें योगी बताया था। उन्होंने लिखा कि दिसंबर की कड़कती ठंड में भी केवल एक टीशर्ट पहने अलसुबह यात्रा पर चलने वाला कोई योगी ही हो सकता है। इसी तरह बिहार के नेता पप्पू यादव ने भी राहुल के बारे मे लिखा कि सच में राहुल तपस्या कर रहे हैं। इस ठंड में नंगे पांव, महज टी शर्ट में क्या देश को भ्रष्ट तानाशाह से मुक्ति दिलाने का संकल्प है।

ये प्रोटीन बनता है ठंड कम लगने की वजह

नेशलन लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में छपी रिपोर्ट के अनुसार जिन लोगों के मसल में एल्फा एक्टिनिक 3 नाम का प्रोटीन कम होता है, उन लोगों में ठंड झेलने की शक्ति बाकी लोगों से बेहतर होती है। दुनिया में इस तरह के 150 करोड़ लोग हैं, जिनमें एल्फा एक्टिनिक 3 प्रोटीन की कमी पाई जाती है। स्टडी के अनुसार ऐसे में लोगों में ठंड कम लगने की एक बड़ी वजह यह प्रोटीन बनता है। हालांकि राहुल गांधी के संबंध में ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं आई है।

एक्सरसाइज का भी फायदा

रोजाना एक्सरसाइज करने वालों का मेटाबॉलिज्म अच्छा होता है। इसलिए ऐसे लोगों को ठंड ज्यादा नहीं लगती है।भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी भी लगातार कई किलोमीटर तक पैदा चल रहे हैं। इसकी वजह से भी लोगों को ठंड का अहसास कम होता है।

नर्वस सिस्टम का भी असर

वैज्ञानिकों के अनुसार ठंड या गर्मी महसूस करने में हमारे नर्वस सिस्टम का अहम रोल होता है। ऐसे में अगर नसों का वो रास्ता जिससे मस्तिष्क को संदेश मिलता है, उसमें कोई डैमेज हो जाए तो मस्तिष्क के जरिए व्यक्ति को ठंड या गर्मी का संदेश नहीं जाता है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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