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छह महीने से नहीं मिला वेतन, डीटीसी कर्मचारियों ने राहुल गांधी के सामने बयां किया अपना दर्द; देखें VIDEO

Delhi News: राहुल गांधी ने दिल्ली परिवहन सेवा (डीटीसी) कर्मचारियों से संवाद का वीडियो साझा किया। इस दौरान उन्होंने इन कर्मचारियों के साथ साथ हो रहे 'अन्याय' को रेखांकित किया। इस वीडियो में ये बात सामने आई कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगातार तैनात होमगार्ड छह महीने से बिना वेतन के काम कर रहे हैं।

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DTC बस में कंडक्टर के साथ राहुल गांधी।

Rahul Gandhi conversation with DTC Employees: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को डीटीसी कर्मचारियों की समस्याओं को रेखांकित किया और कहा कि जो लोग प्रतिदिन लाखों यात्रियों की यात्रा को सुगम बनाते हैं, उन्हें बदले में केवल ‘अन्याय’ का सामना करना पड़ता है। दिल्ली परिवहन सेवा (डीटीसी) के कर्मचारियों के साथ पिछले सप्ताह हुई बातचीत और बस में सफर का वीडियो साझा करते हुए गांधी ने कहा कि डीटीसी कर्मचारी सरकार से पूछ रहे हैं कि यदि वे स्थायी नागरिक हैं तो उनकी नौकरियां अस्थायी क्यों हैं।

राहुल गांधी ने डीटीसी कर्मचारियों से किया संवाद

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, 'कुछ दिनों पहले दिल्ली में एक सुखद बस यात्रा के अनुभव के साथ डीटीसी कर्मचारियों से संवाद कर उनकी दिनचर्या और समस्याओं की जानकारी ली।' उन्होंने कहा, 'न सामाजिक सुरक्षा, न स्थिर आय और न ही स्थाई नौकरी...। ठेके पर मजदूरी ने एक बड़ी ज़िम्मेदारी के काम को मजबूरी के मुकाम पर पहुंचा दिया है।'

छह महीने से बिना वेतन के काम कर रहे हैं होमगार्ड

राहुल गांधी ने कहा कि ड्राइवर और कंडक्टरों को अनिश्चितता के अंधेरे में जीने के लिए मजबूर किया जा रहा है, तथा यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगातार तैनात होमगार्ड छह महीने से बिना वेतन के काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस उपेक्षा से त्रस्त होकर देश भर के सरकारी कर्मचारियों की तरह डीटीसी कर्मचारी भी लगातार निजीकरण के डर के साए में जी रहे हैं।

उन्होंने कहा, 'ये वह लोग हैं जो भारत को चलाते हैं। प्रतिदिन लाखों यात्रियों के सफर को सुगम बनाते हैं - मगर समर्पण के बदले उन्हें कुछ मिला है तो सिर्फ अन्याय। मांगें स्पष्ट हैं - समान काम, समान वेतन, पूरा न्याय!' पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि ये कर्मचारी भारी मन और दुखी दिल से सरकार से पूछ रहे हैं कि वे नागरिक पक्के हैं तो उनकी नौकरी कच्ची क्यों?

उबर की सवारी करते हुए दिखाई दे रहे हैं राहुल गांधी

वीडियो में राहुल गांधी एक ड्राइवर के साथ उबर की सवारी करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस ड्राइवर के साथ उन्होंने कुछ दिनों पहले यात्रा की थी और बाद में सरोजिनी नगर बस डिपो के पास उस स्थान पर गिग वर्कर्स की समस्याओं को रेखंकित करते हुए एक वीडियो जारी किया था। उन्होंने पिछले बुधवार को ड्राइवरों, कंडक्टरों और मार्शलों के साथ बातचीत की थी। गांधी ने एक फेसबुक पोस्ट में अपनी बातचीत और बस में सफर की तस्वीरें भी साझा की थीं।

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था, 'ड्राइवर और कंडक्टर भाइयों और दिल्ली में बस मार्शलों के साथ एक बैठक और चर्चा हुई और फिर डीटीसी की बस में एक मजेदार सवारी हुई। अपने प्रियजनों के साथ उनके मुद्दों पर बात!'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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