देश में युवाओं के भविष्य और रोजगार के मुद्दे पर राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक भावुक और आक्रामक पोस्ट लिखकर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। प्रयागराज में एक छात्र से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सालों तक मेहनत करने, घर-जमीन बेचने और कर्ज में डूबने के बाद भी आज देश का युवा खाली हाथ खड़ा रहने पर मजबूर है।
राहुल गांधी के मुताबिक, यह असफलता किसी छात्र की नहीं, बल्कि उस लाचार व्यवस्था की है जो युवाओं की कड़ी मेहनत का सही मूल्य देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। राहुल गांधी ने देश की राजधानी में अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे छात्रों पर हुए पुलिसिया बल प्रयोग पर गहरा दुख और रोष जताया। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं पर लाठियां और पैलेट गन चलने के बावजूद सरकार का कोई भी प्रतिनिधि जवाब देने को तैयार नहीं है।
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युवाओं के हक और जवाबदेही की मांग को नहीं दबा सकते-राहुल गांधी
विपक्ष के नेता ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि सरकार चाहे जितनी भी अनदेखी कर ले, युवाओं के हक और जवाबदेही की मांग को दबाया नहीं जा सकता। इससे पहले प्रयागराज में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान भी राहुल गांधी ने युवाओं के सामने देश के मौजूदा ढांचे की जमीनी हकीकत रखी थी। उन्होंने 'दर्द, डेटा और दौलत' का गणित समझाते हुए कहा कि आज मेहनत और डेटा आम जनता का है, लेकिन देश की पूरी दौलत कुछ चुनिंदा हाथों में सिमटकर रह गई है।
वह छात्रों के संघर्ष में पूरी ताकत के साथ खड़े-कांग्रेस नेता
प्रयागराज को देश में ज्ञान का ऐतिहासिक केंद्र बताते हुए उन्होंने युवाओं को भारत की सबसे बड़ी संपत्ति करार दिया। राहुल गांधी ने कहा कि भारत के पास 40 करोड़ युवाओं की जो असीम ऊर्जा है, उसके सामने चीन, अमेरिका या रूस जैसी कोई भी शक्ति नहीं टिक सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर भारत को वास्तव में आगे बढ़ना है, तो उसकी नींव देश के इन्हीं युवाओं के कंधों पर रखनी होगी। राहुल गांधी ने भरोसा दिलाया कि वह छात्रों के इस संघर्ष में पूरी ताकत के साथ उनके साथ खड़े रहेंगे।
