पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या कभी गहरे राजनीतिक सहयोगी रहे बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल (BJP SAD Alliance) एक बार फिर हाथ मिलाने जा रहे हैं? इस चर्चा को उस वक्त और हवा मिल गई जब अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने नई दिल्ली में संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में दोनों दलों के पुराने गठबंधन को फिर से शुरू करने को लेकर चर्चा हुई थी। हाल ही में सुखबीर सिंह बादल ने चंडीगढ़ में वरिष्ठ नेताओं की बैठक के बाद केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें सभी राज्यों की सीटों में एक समान 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की बात कही गई है।
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इसके साथ ही उन्होंने देश में महिला आरक्षण विधेयक को तुरंत लागू करने और एक निष्पक्ष परिसीमन की मांग भी जोर-शोर से उठाई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह गठबंधन दोबारा बनता है, तो इससे दोनों पार्टियों को बड़ा राजनीतिक फायदा हो सकता है। बीजेपी का प्रभाव मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों में है, जबकि अकाली दल की पकड़ ग्रामीण पंजाब में मजबूत है।
साल 2020 में टूटा 25 साल पुराना गठबंधन
सूत्रों के मुताबिक, अकाली दल, राज्य बीजेपी इकाई, आरएसएस और कांग्रेस से बीजेपी में आए नेता भी इस गठबंधन के पक्ष में हैं। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को लेना है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या चुनाव से पहले पंजाब की ये दो पुरानी ताकतें फिर से एक मंच पर नजर आएंगी या नहीं। बता दें कि बीजेपी और अकाली दल के बीच करीब ढाई दशक पुराना गठबंधन साल 2020 में तीन विवादित कृषि कानूनों के विरोध के चलते टूट गया था।
विधानसभा और लोकसभा का लड़ा अलग-अलग चुनाव
इसके बाद अकाली दल ने एनडीए से अलग होने का बड़ा फैसला किया था। नतीजतन, दोनों दलों ने 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा, जिससे दोनों को ही राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि, अलग होने के बावजूद दोनों दलों के नेताओं के बीच समय-समय पर हुई मुलाकातों ने गठबंधन की उम्मीदों को जिंदा रखा है।
