देश

EVM पर एलन मस्क के दावे पर मचा बवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अरबपति कारोबारी को दी नसीहत तो राहुल गांधी ने खड़े किए सवाल

Elon Musk on EVM: राहुल गांधी ने एलन मस्क के दावे का समर्थन करते हुए ईवीएम पर सवाल खड़े किए हैं तो वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर इसके विरोध में उतर आए हैं, यहां तक कि उन्होंने टेस्ला के सीईओ एलन मस्क को भारत आकर कुछ सीख लेने की नसीहत तक दे दी है।

Image

Rahul Gandhi - Elon Musk - Rajeev chandrasekhar

Elon Musk on EVM: इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM को लेकर अरबपति कारोबारी एलन मस्क के बयान पर भारत में बवाल शुरू हो गया है। राहुल गांधी ने एलन मस्क के दावे का समर्थन करते हुए ईवीएम पर सवाल खड़े किए हैं तो वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर इसके विरोध में उतर आए हैं, यहां तक कि उन्होंने टेस्ला के सीईओ एलन मस्क को भारत आकर कुछ सीख लेने की नसीहत तक दे दी है।

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में दावेदार रॉबर्ट एफ कैनेडी ने ईवीएम को लेकर एक पोस्ट किया था। इसको रीट्वीट करते हुए एलन मस्क ने कहा कि ईवीएम को इंसानों व एआई तकनीक द्वारा हैक किया जा सकता है, इसे हटा दिया जाना चाहिए। एलन मस्क की यह टिप्पणी तब आई है जब भारत में लोकसभा चुनाव से पहले ईवीएम को लेकर काफी हो-हल्ला मचा हुआ था। हालांकि, चुनाव के बाद यह मुद्दा खत्म हो गया। अब मस्क की टिप्पणी से एक बार फिर से ईवीएम पर बहस शुरू हो गर्ठ है।

भारत आकर सीख लें मस्क - राजीव चंद्रशेखर

पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) को वोटिंग से हटाने के बारे में एलन मस्क के विचारों को एक व्यापक आम बयान बताते हुए रविवार को कहा कि इसमें कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि टेस्ला के सीईओ एलन मस्क को भारत आकर कुछ सीख लेनी चाहिए। राजीव चंद्रशेखर के अनुसार, एलन मस्क के सोचने-समझने का तरीका अमेरिका और अन्य स्थानों पर लागू हो सकता है, जहां पर वे इंटरनेट से जुड़ी वोटिंग मशीन बनाने के लिए रेगुलर कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं। उन्होंने मस्क के बयान को खारिज करते हुए कहा कि भारतीय ईवीएम कस्टम-डिजाइन किए गए हैं, सुरक्षित हैं और किसी भी नेटवर्क या मीडिया से अलग हैं। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को ठीक उसी तरह से डिजाइन और बनाया जा सकता है, जैसा कि भारत ने किया है। एलन, हमें एक ट्यूटोरियल चलाने में खुशी होगी।

भारत में ईवीएम ब्लैक बॉक्स - राहुल गांधी

उधर, राहुल गांधी ने एलन मस्क के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए कहा है कि भारत में ईवीएम एक ब्लैक बॉक्स है और किसी को भी उनकी जांच करने की अनुमति नहीं है। हमारी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। जब संस्थाओं में जवाबदेही की कमी होती है, तो लोकतंत्र एक दिखावा बन जाता है और धोखाधड़ी की संभावना बढ़ जाती है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article