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Pulwama Attack: चार साल पहले आज ही के दिन जब रो पड़ा था पूरा देश, भीषण आतंकी हमले में शहीद हो गए थे 40 जवान

  • Authored by: किशोर जोशी
  • Updated Feb 14, 2023, 07:19 AM IST

Pulwama Attack: 14 फरवरी का दिन इतिहास की तारीख में एक दुखद घटना के साथ दर्ज है। चार साल पहेल हुई उस घटना के जख्म आज तक हरे हैं, जब आतंकवादियों ने इस दिन को देश के सुरक्षाकर्मियों पर कायराना हमले के लिए चुना।

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पुलवामा हमले के तुरंत बाद की एक तस्वीर

Pulwama Attack: पुलवामा आतंकी हमले की आज चौथी बरसी है। इस बरसे से पहले घाटी में चप्पे- चप्पे पर सुरक्षा एजेंसिया की नजर है। साल 2019 में पुलावामा हमले में करीब 40 से अधिक जवानों की जान गई थी। सुबह 10 बजे श्रद्धांजलि सभा का आयोजन होगा जिसमें सीनियर आर्मी अधिकारी मौजूद रहेंगे। पुलवामा हमले की बरसी पर हाई अलर्ट जारी किया है और सुरक्षा एजेंसिया जम्मू-कश्मीर में माहौल सही रखने के लिए चप्पे-चप्पे पर नजर रख रही है।

खौफनाक था वो दृश्य

आज ही के दिन जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकवादी ने विस्फोटकों से लदे वाहन से सीआरपीएफ जवानों की बस को टक्कर मार दी, जिसमें कम से कम 40 जवान शहीद हो गये और कई गंभीर रूप से घायल हुए। हमले के बाद पुलवामा में एक अजब सा भयवाह दृश्य था। जवानों को ले जा रहे सेना के ट्रक के अलावा जले हुए शरीर के अंग और क्षत-विक्षत स्टील राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 44 के जम्मू-श्रीनगर खंड में बिखरे पड़े थे, जो दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले से होकर गुजरता है। हमले के तुरंत बाद, जैश-ए-मोहम्मद ने 22 वर्षीय हमलावर आदिल अहमद डार का एक वीडियो पोस्ट करते हुए हमले की जिम्मेदारी ली।

भारत ने दिया जवाब

भारत के सुरक्षा बलों पर घातक हमले के कुछ दिनों बाद आतंकवाद-रोधी हवाई हमले किए गए। 26 फरवरी, 2019 के तड़के भारतीय वायु सेना के कई लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के बालाकोट स्थित आतंकी संगठन जैश के आतंकी शिविरों पर बमबारी की, जिसमें करीब 500 आतंकवादी मारे गए। बालाकोट में हवाई हमले के बाद, पाकिस्तान वायु सेना ने जम्मू और कश्मीर में भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला करके जवाबी कार्रवाई करने की कोशिश की, जिसे भारतीय वायुसेना ने नाकाम कर दिया। संघर्ष के दौरान, भारत के विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान को पाकिस्तान की सेना ने ने पकड़ लिया, हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

पुलवामा हमले की भयावहता का सामना करते हुए हमें 4 साल हो गए हैं, लेकिन आज भी 14 फरवरी को सीआरपीएफ के उन बहादुर जवानों की याद में 'काला दिवस' के रूप में मनाया जाता है, जिन्होंने हमले में अपनी जान गंवाई थी।

किशोर जोशी
किशोर जोशीauthor

राजनीति में विशेष दिलचस्पी रखने वाले किशोर जोशी को और खेल के साथ-साथ संगीत से भी विशेष लगाव है। यह टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल में नेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं। किशोर के पास डिजिटल मीडिया का 10 सालों का अनुभव है।

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