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Ram Janmabhoomi: प्रधानमंत्री मोदी ने राम मंदिर पर फहराई धर्म ध्वजा, बोले-ये भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज; पढ़ें संबोधन की 10 बड़ी बातें

पीएम मोदी ने कहा कि आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और बिंदु की साक्षी बन रही है। आज संपूर्ण भारत और विश्व राममय है। हर राम भक्त के हृदय में अपार अलौकिक आनंद है। सदियों के घाव भर रहे हैं। आज सदियों की वेदना विराम पा रही है। सदियों का संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहा है। पढ़ें उनके संबोधन की बड़ी बातें...

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रामंंदिर में धर्म ध्वजा फहराने के बाद संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। तस्वीर-टाइम्स नाउ नवभारत

अयोध्या के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। आज शुभ मुहूर्त में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर वैदिक मंत्रोच्चार और जय श्री राम के नारों की गूंज के बीच धर्म ध्वज फहराया। इस अनुष्ठान के साथ ही मंदिर का निर्माण औपचारिक रूप से पूरा हो गया। इस मौके पर पीएम मोदी ने सियावर रामचंद्र के जयघोष के साथ अपना संबोधन शुरू किया। पीएम मोदी ने कहा कि आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और बिंदु की साक्षी बन रही है। आज संपूर्ण भारत और विश्व राममय है। हर राम भक्त के हृदय में अपार अलौकिक आनंद है। सदियों के घाव भर रहे हैं। आज सदियों की वेदना विराम पा रही है। सदियों का संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहा है। पढ़ें उनके संबोधन की बड़ी बातें...

'ये भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज'

पीएम मोदी ने कहा कि आज पूरी दुनिया राममय है। ये धर्मध्वजा केवल एक ध्वजा नहीं,ये भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है। धर्म ध्वज का भगवा रंग और इस पर रचित सूर्यवंश की ख्याति और अंकित कोविदार वृक्ष राम राज्य की कृति को प्रतिरूपित करता है। ये ध्वज संकल्प,सफलता और सदियों से सपनों का साकार रूप है। पीएम मोदी ने कहा कि ये ध्वज संघर्ष से सृजन की गाथा है। सदियों से चले आ रहे स्वप्नों का साकार स्वरूप है। ये ध्वज संतों की साधना और समाज की सहभागिता की सार्थक परिणीति है। आज भगवान श्रीराम के गृभगृह की अनंत ऊर्जा, श्रीराम परिवार का दिव्य प्रताप, इस धर्मध्वजा के रूप में इस दिव्यतम और भव्यतम मंदिर में प्रतिष्ठापित हुआ है।

राममंदिर में योगदान देने वालों का किया अभिनंदन

इस मौके पर पीएम मोदी ने राममंदिर के निर्माण में योगदान देने वाले दानवीर, श्रमवीर, मंदिर निर्माण में लगे कारीगरों-वास्तुकारों का अभिनंनद भी किया। उन्होंने कहा कि मैं संपूर्ण विश्व के करोड़ों राम भक्तों को इस अविस्मरणीय क्षण की इस अद्वितीय अवसर की शुभकामनाएं देता हूं। मैं आज उन सभी भक्तों को भी प्रणाम करता हूं हर उस दानवीर को भी आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए अपना सहयोग दिया। यह वही नगरी है, जहां से भगवान श्रीराम ने अपना जीवन पथ शुरू किया था। अयोध्या ने दुनिया को दिखाया कि कैसे एक व्यक्ति, समाज के बल और अपने भीतर स्थापित मूल्यों से 'मर्यादा पुरुषोत्तम'बनता है। जब श्री राम अयोध्या से गए थे,तब वे एक राजकुमार थे। जब वे लौटे तो वे मर्यादा पुरुषोत्तम बनकर लौटे।

अगर हमारे राष्ट्र को आगे बढ़ना है,तो हमें अपनी विरासत पर गर्व करना होगा

पीएम मोदी मे कहा कि आज जब राम मंदिर के प्रांगण में कोविदारा वृक्ष की पुनः स्थापना हो रही है,तो यह केवल एक वृक्ष की वापसी नहीं है। यह हमारी स्मृति की वापसी है। यह हमारी पहचान का पुनर्जागरण है। कोविदारा वृक्ष हमें याद दिलाता है कि जब हम भूल जाते हैं कि हम कौन हैं,तो हम स्वयं को खो देते हैं। और जब हमारी पहचान लौटती है, तो उसके साथ एक पूरे राष्ट्र का साहस और आत्मविश्वास भी लौटता है। अगर हमारे राष्ट्र को आगे बढ़ना है, तो हमें अपनी विरासत पर गर्व करना होगा।

'प्राण जाए,पर वचन न जाए'

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि ये धर्मध्वज प्रेरणा बनेगा कि प्राण जाए,पर वचन न जाए अर्थात जो कहा जाए वही किया जाए। उन्होंने कहा कि ये धर्मध्वज संदेश देगा कि कर्मप्रधान विश्व रचि राखा अर्थात विश्व में कर्म और कर्तव्य की प्रधानता हो। ये धर्मध्वज कामना करेगा - बैर न बिग्रह आस न त्रासा, सुखमय ताहि सदा सब आसा यानी भेदभाव,पीड़ा,परेशानी से मुक्ति और समाज में शांति एवं सुख हो। हम ऐसा समाज बनाएं, जहां कोई गरीब न हो। कोई पीड़ित ना हो। यह ध्वज युगों युगों तक श्री राम के आदेशों और प्रेरणाओं को मानव मात्र तक पहुंचाएगा।

'सत्य में ही धर्म स्थापित'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि आने वाली सदियां और सहस्र शताब्दियों तक ये धर्म ध्वज प्रभु राम के आर्दशों और सिद्धांतों का उद्घोष करेगा,ये धर्म ध्वज आह्वान करेगा कि सत्य की जीत होती है असत्य की नहीं। ये धर्म ध्वज उद्घोष करेगा कि सत्य ही ब्रह्म का स्वरूप है। सत्य में ही धर्म स्थापित है।

हमारे राम भेद से नहीं भाव से जुड़ते हैं

पीएम मोदी ने कहा कि हम सब जानते हैं कि हमारे राम भेद से नहीं भाव से जुड़ते हैं। उनके लिए व्यक्ति का कुल नहीं,उसकी भक्ति महत्वपूर्ण है। उन्हें वंश नहीं,मूल्य प्रिय है। उन्हें शक्ति नहीं,सहयोग महान लगता है। आज हम भी उसी भावना से आगे बढ़ रहे हैं।

हमें भगवान राम से सीखना होगा

पीएम ने कहा कि हमें भगवान राम से सीखना होगा। हमें उनके चरित्र की गहराई को समझना चाहिए। हमें याद रखना चाहिए कि राम का अर्थ है मर्यादा राम का अर्थ है जीवन और आचरण का सर्वोच्च आदर्श। राम सर्वोच्च सदाचार के जीवन का प्रतिनिधित्व करते हैं। राम धर्म के मार्ग पर चलने वाले व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व करते हैं।

'21वीं सदी की अयोध्या मानवता को विकास का नया मॉडल दे रही'

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज अयोध्या फिर से वह नगरी बन रही है,जो दुनिया के लिए उदाहरण बनेगी। उन्होंने कहा कि त्रेता युग की अयोध्या ने मानवता को नीति दी। 21वीं सदी की अयोध्या मानवता को विकास का नया मॉडल दे रही है। तब अयोध्या मर्यादा का केंद्र थी। अब अयोध्या विकसित भारत का मेरुदंड बनकर उभर रही है।भविष्य की अयोध्या में पौराणिकता और नूतनता का संगम होगा। सरयू जी की अमृतधारा और विकास की धारा एक साथ बहेगी। यहां आध्यात्म और एआई दोनों का तालमेल दिखेगा।

'2047 तक हमें विकसित भारत का निर्माण करना ही होगा'

पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल के बारे में बात करते हुए कहा कि पिछले 11 वर्षों में महिला,दलित,पिछड़े,अति-पिछड़े,आदिवासी,वंचित,किसान,श्रमिक और युवा हर वर्ग को विकास के केंद्र में रखा गया है। जब देश का हर व्यक्ति,हर वर्ग,हर क्षेत्र सशक्त होगा,तब संकल्प की सिद्धि में सबका प्रयास लगेगा और सबके प्रयास से ही 2047 में जब देश आजादी के 100 साल मनाएगा,तब तक हमें विकसित भारत का निर्माण करना ही होगा।

राम मंदिर का दिव्य प्रांगण भारत के सामूहिक सामर्थ्य की भी चेतना स्थली बन रहा

पीएम मोदी ने कहा कि मुझे बहुत खुशी है कि राम मंदिर का ये दिव्य प्रांगण भारत के सामूहिक सामर्थ्य की भी चेतना स्थली बन रहा है। यहां सप्त मंदिर बने हैं। यहां माता शबरी का मंदिर बना है,जो जनजातीय समाज के प्रेमभाव और आतिथ्य की प्रतिमूर्ति है। यहां निषादराज का मंदिर बना है,ये उस मित्रता का साक्षी है,जो साधन नहीं,साध्य को और उसकी भावना को पूजती है। यहां एक ही स्थान पर माता अहिल्या हैं,महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ,महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य हैं और संत तुलसीदास हैं। रामलला के साथ-साथ इन सभी ऋषियों के दर्शन भी यहीं पर होते हैं। यहां जटायु जी और गिलहरी की मूर्तियां भी हैं। जो बड़े संकल्पों की सिद्धि के लिए हर छोटे से छोटे प्रयास के महत्व को दिखाती हैं।

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Shiv Shukla
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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