President Droupadi Murmu Train Journey: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने तीन दिवसीय ओडिशा दौरे के दौरान 4 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर से ब्रह्मपुर तक 170 किलोमीटर की रेल यात्रा कर एक नया इतिहास रच दिया है। यह पहला मौका है जब भारत के कोई आसीन राष्ट्रपति रेल मार्ग से ब्रह्मपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे हैं। क्षेत्र में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए हवाई सफर के बजाय रेल यात्रा को प्राथमिकता दी गई थी। इस यात्रा की शुरुआत भुवनेश्वर स्टेशन से हुई, जहां एक महिला ट्रेन मैनेजर ने हरी झंडी दिखाकर VVIP ट्रेन को रवाना किया। पद संभालने के बाद से यह राष्ट्रपति मुर्मू की तीसरी आधिकारिक रेल यात्रा है।
18 कोचों वाला VVIP रेक
2006 में सेवानिवृत्त की गई पुरानी लकड़ी की प्रेसिडेंशियल सैलून के विपरीत, वर्तमान 'प्रेसिडेंशियल स्पेशल' आधुनिक तकनीकों और राजसी सुविधाओं से लैस 18 डिब्बों का एक अति-सुरक्षित मोबाइल प्लेटफॉर्म है। ट्रेन की मुख्य विशेषताएं और सुविधाएं:
-इसमें बुलेट-प्रतिरोधी डबल-ग्लाज्ड खिड़कियां, एयर-कंडीशनर बेडरूम और कूटनीतिक संचार प्रणाली शामिल हैं।
-ट्रेन में एक समर्पित कॉन्फ्रेंस रूम, सचिवालय कोच, VIP मीटिंग लाउंज और आधिकारिक बैठकों के लिए अतिथि आवास की व्यवस्था है।
-पेंट्री और फुल-सर्विस किचन के साथ लग्जरी डाइनिंग कोच मौजूद हैं, जो पूरे सफर के दौरान VVIP मेहमानों के खान-पान का ध्यान रखते हैं।
-ट्रेन में आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं, इंजीनियरिंग सपोर्ट, हाउसकीपिंग और लॉजिस्टिक्स स्टाफ के लिए अलग डिब्बे शामिल हैं।
-उन्नत एयर-सस्पेंशन तकनीक के कारण ट्रेन 90 से 100 किमी/घंटा की गति पर बिना झटके के चलती है, जिससे यह 170 किमी का सफर महज दो घंटे से कुछ अधिक समय में पूरा हो गया।
VVIP रेल यात्रा का अभेद्य सुरक्षा घेरा
भारतीय रेलवे के कड़े प्रोटोकॉल के तहत राष्ट्रपति की ट्रेन अकेले ट्रैक पर नहीं दौड़ती, बल्कि तीन ट्रेनों के एक समन्वित नेटवर्क द्वारा संचालित होती है। सुरक्षा कॉन्वॉय की संरचना:
पायलट ट्रेन: यह समर्पित सुरक्षा ट्रेन 'प्रेसिडेंशियल स्पेशल' से ठीक आगे-आगे चलती है, जो पूरे ट्रैक की मजबूती, सिग्नलिंग और सुरक्षा मानकों को जांचते हुए रास्ता साफ करती है।
प्रेसिडेंशियल स्पेशल: यह बीच में चलने वाली मुख्य 18-कोच वाली ट्रेन है, जिसमें राष्ट्रपति मुर्मू के साथ ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कसमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और राष्ट्रपति भवन का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल सवार था।
रियर एस्कॉर्ट ट्रेन: यह तीसरी सामरिक ट्रेन पीछे के फ्लैंक की सुरक्षा के लिए मुख्य ट्रेन के ठीक पीछे-पीछे चलती है।
स्टैंडबाय प्रोविजन: किसी भी यांत्रिक खराबी या तकनीकी आपातस्थिति से निपटने के लिए नजदीकी स्टेशन पर एक बैकअप ट्रेन को पूरी तरह तैयार रखा जाता है।

राष्ट्रपति जब ट्रेन से चलती हैं तो क्या होता है?
ट्रैक सैनिटाइजेशन और बहुस्तरीय सुरक्षा ग्रिड
राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान पूरे 170 किलोमीटर के रेल रूट पर यातायात को पूरी तरह से डायवर्ट और सैनिटाइज किया गया था। कड़े सुरक्षा नियम:
ट्रैक क्लीयरेंस और ओवरटेकिंग पर रोक: VVIP ट्रेन के चलने की समय-सीमा के दौरान सक्रिय ट्रैक पर किसी भी पैसेंजर, एक्सप्रेस या मालगाड़ी को चलाने की अनुमति नहीं दी गई। प्रेसिडेंशियल स्पेशल को ओवरटेक करने या उसके पीछे चलने पर पूर्ण प्रतिबंध था।
विपरीत दिशा की ट्रेनें रुकीं: विपरीत दिशा से आने वाली सभी ट्रेनों को नजदीकी स्टेशनों या आउटर सिग्नल पर तब तक रोक कर रखा गया जब तक कि राष्ट्रपति का काफिला सुरक्षित रूप से गुजर न गया।
लेवल क्रॉसिंग व प्लेटफॉर्म पाबंदी: 170 किमी के दायरे में आने वाले हर एक लेवल क्रॉसिंग पर सुरक्षाकर्मी तैनात थे। भुवनेश्वर और ब्रह्मपुर स्टेशनों के प्लेटफॉर्म नंबर 1 और 2 को प्रस्थान से 3 घंटे पहले ही सील कर दिया गया था और आम यात्रियों को अन्य प्लेटफॉर्मों पर डायवर्ट किया गया।
नो-ड्रोन जोन: राज्य पुलिस, आरपीएफ (RPF), जीआरपी (GRP) और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के कड़े पहरे के साथ पूरे रेल कॉरिडोर को नो-ड्रोन और नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया था।
