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जन सुराज के लिए 200 करोड़ जुटाएंगे प्रशांत किशोर, बिहार के लोगों से मांगेगे 100-100 रुपये का चंदा

Prashant Kishor: प्रशांत किशोर ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले 13 करोड़ जनसंख्या वाले बिहार में सिर्फ दो करोड़ लोग 100-100 रुपए जन सुराज पार्टी को दें, जिससे चुनाव लड़ा जा सके। अगर ऐसा होता है तो जन सुराज पार्टी के पास 200 करोड़ रुपए हो जाएगा।

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Prashant Kishor

Prashant Kishor: चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने मंगलवार कहा कि चुनाव के लिए बिहार के दो करोड़ लोगों से 100-100 रुपए मांगेंगे। यह स‍िलस‍िला दो अक्‍टूबर से शुरू होगा। प्रशांत किशोर ने कहा कि अभी तक जन सुराज पार्टी के अभियान को, जिन लोगों की मैंने प‍िछले 10 सालों में मदद की है, उनसे पैसा मांगकर चलाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि बिहार में कोई नहीं कह सकता कि हम लूटे पैसे से पार्टी चला रहे हैं। अन्य राजनीतिक दल जहां भू-माफिया और खनन-माफिया के माध्यम से लोगों को लूट कर पार्टी चला रहे हैं, वहीं हम लोगों के दिए पैसे से पार्टी चला रहे हैं। उन्होंने कहा क‍ि ब‍िहार में गरीब से गरीब व्यक्ति को भी क‍िसी से डरने की जरूरत नहीं है। उसे चुनाव लड़ने के लिए पैसा जन सुराज पार्टी देगी।

दो करोड़ लोग दें 100-100 रुपये

प्रशांत किशोर ने कहा कि दो अक्टूबर से हम ऐसी व्यवस्था बना रहे हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले 13 करोड़ जनसंख्या वाले बिहार में सिर्फ दो करोड़ लोग 100-100 रुपए जन सुराज पार्टी को दें, जिससे चुनाव लड़ा जा सके। अगर ऐसा होता है तो जन सुराज पार्टी के पास 200 करोड़ रुपए हो जाएगा। बता दें कि मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देवेंद्र प्रसाद यादव जन सुराज पार्टी में शामिल हो गए। उन्होंने मंगलवार को एक कार्यक्रम में जन सुराज पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस मौके पर बड़ी संख्या में उनके समर्थक भी जन सुराज पार्टी में शामिल हुए। यादव पांच बार झंझारपुर से सांसद रहे हैं और अब उनका जनसुराज में शामिल होना आरजेडी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

...तब तक नहीं पूरा होगा जेपी और लोहिया का सपना

जन सुराज पार्टी में शाम‍िल होने पर प्रशांत किशोर ने देवेंद्र यादव का स्वागत किया और कहा क‍ि देवेंद्र यादव जैसे नेता और जन सुराज अभियान बिहार की राजनीति के कुम्हार के रूप में कार्य कर रहे हैं। किशोर ने कहा कि यादव और उनके जैसे अन्य लोग "अच्छी मिट्टी" हैं, जबकि जन सुराज अभियान "चाक" की तरह है, जो इन नेताओं को उचित आकार देने में मदद करेगी। उन्होंने यह भी कहा क‍ि जब तक पंजाब और हरियाणा के लोग बिहार में काम करने नहीं आएंगे, तब तक जय प्रकाश नारायण और लोहिया का सपना पूरा नहीं होगा।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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