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लोकसभा चुनाव के नतीजों पर पहली बार बोले प्रशांत किशोर, गलत भविष्यवाणी पर मानी गलती, कही यह बात

Prashant Kishore on Poll Prediction: प्रशांत किशोर ने दावा किया था कि बीजेपी 2019 के 303 के आंकड़े के बराबर या उससे ज्यादा सीटें ला सकती है, लेकिन उनका अनुमान गलता रहा। इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस को 100 से कम सीटें जीतने का अनुमान लगाया था, यह भी गलत रहा है।

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प्रशांत किशोर

Prashant Kishore on Poll Prediction: लोकसभा चुनाव के नतीजे जारी होने के बाद सबसे ज्यादा जिस बात की चर्चा है तो वह है एग्जिट पोल। लगभग सभी एग्जिट पोल में बीजेपी को 300 से ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन जब चुनाव परिणाम आए तो सारे एग्जिट पोल धरे के धरे रह गए। चुनाव से पूर्व बीजेपी के पक्ष में भविष्वाणी करने वालों में जानेमाने रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी थे। उनकी भविष्वाणी भी गलत साबित हुई। इसके बाद प्रशांत किशोर को काफी ट्रोल भी किया जा रहा है। ऐसे में 4 जून को रिजल्ट जारी होने के बाद पहली बार प्रशांत किशारे ने खुद के 'पोल प्रीडिक्शन' पर उठ रहे सवालों को जवाब दिया है।

प्रशांत किशोर ने माना है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों को लेकर उनका प्रीडिक्शन गलत साबित रहा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि कई राज्यों में उन्होंने जैसा अनुमान लगाया था, बीजेपी को उतनी ही सीटें मिली। दरअसल, प्रशांत किशोर इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में इसको लेकर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि चुनाव को लेकर की गई भविष्णवाणी गलत साबित होना कोई बड़ी बात नहीं है, कोई भी गलत हो सकता है।

प्रशांत किशोर के क्या-क्या दावे गलत हुए

चुनाव विश्लेषज्ञ प्रशांत किशोर ने दावा किया था कि बीजेपी 2019 के 303 के आंकड़े के बराबर या उससे ज्यादा सीटें ला सकती है, लेकिन उनका अनुमान गलता रहा। इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस को 100 से कम सीटें जीतने का अनुमान लगाया था, यह भी गलत रहा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और राजस्थान को लेकर भी बीजेपी के पक्ष में भविष्यवाणी की थी, लेकिन यहां पर भी वे फेल हुए।

प्रशांत किशोर ने क्या कहा?

इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने कहा कि इसमें कोई बड़ी बात नहीं है, कोई भी गलत हो सकता है। उन्होंने कहा, अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव में 400 सीटें आने का दावा किया था, लेकिन उनकी 125 सीटें आईं। इसका मतलब यह नहीं है कि अखिलेश यादव की राजनीतिक समझ खत्म हो गई। इसी तरह अमित शाह ने भी बंगाल में 200 तो राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में बहुमत आने का दावा किया था। दोननों के दावे लगत हुए। इसका मतलब यह नहीं है कि अमित शाह और राहुल गांधी में कोई राजनीतिक समझ नहीं है। उन्होंने कहा, मैं मानता हूं कि हमारे नंबर गलत साबित हुए, लेकिन हमारा सिर्फ 20 प्रतिशत आंकलन ही गलत हुआ।

चार राज्यों के आंकड़े गलत हुए

प्रशांत किशोर ने कहा कि मेरा चार राज्यों को लेकर आंकलन गलत साबित हुआ। वह हैं बंगाल, यूपी, राजस्थान और महाराष्ट्र। इसके अलावा अन्य राज्यों में मेरा अनुमान सही रहा। उन्होंने कहा, भले ही बीजेपी को उतनी सीटें नहीं आई हों, जिसका मैंने अनुमान लगाया था। हालांकि, मेरे आंकलन का डायरेक्शन सही था। एनडीए एक बार फिर से सरकार बना रहा है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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