पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा ली जा रही मनमानी फीस को लेकर बड़ा फैसला किया है। यहां निजी स्कूलों के इस मनमानेपन पर लगाम लगाने के लिए राज्यपाल ने एक अध्यादेश को मंजूरी दी है। जिसके बाद सीएम भगवंत मान ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि राज्यपाल द्वारा पारित यह ऑर्डिनेंस आज से लागू हो जाएगा। साथ ही हम एक पोर्टल शुरू करने जा रहे हैं। इस पोर्टल पर सभी निजी स्कॉलों को अपने पिछले 4 साल की फीस का ब्यौरा देना पड़ेगा।
भगवंत मान ने कहा कि राज्य सरकार ने इस अध्यादेश को पहले कैबिनेट में मंजूरी देकर राज्यपाल के पास भेजा था और अब इसे स्वीकृति मिल गई है। उन्होंने इसके लिए राज्यपाल का आभार भी जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमृतसर में एक छात्रा की दुखद मौत के बाद उन्हें बड़ी संख्या में अभिभावकों के फोन आए थे, जिनमें निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि और अतिरिक्त शुल्कों की शिकायत की गई थी।
अमृतसर में छात्र ने की थी आत्महत्या
गौरतलब है कि पिछले महीने अमृतसर में 17 वर्षीय एक छात्रा ने कथित तौर पर स्कूल फीस बकाया होने के कारण मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी। इस घटना के बाद निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था को लेकर राज्य में बहस तेज हो गई थी।
कोरोना काल में भी वसूल लिया गया ट्रांसपोर्ट शुल्क
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि शिक्षा को व्यवसाय का रूप नहीं दिया जाना चाहिए। कई अभिभावकों ने शिकायत की थी कि स्कूल भवन शुल्क, परिवहन शुल्क, स्विमिंग पूल शुल्क, शैक्षणिक भ्रमण शुल्क और अन्य कई मदों में अतिरिक्त पैसे वसूलते हैं। कुछ मामलों में तो कोविड-19 महामारी के दौरान भी ट्रांसपोर्ट शुल्क लिया गया।
फीस को लेकर क्या हैं नए प्रावधान?
राज्य सरकार निजी स्कूलों की ओर से वसूली जाने वाली भारी-भरकम और विभिन्न प्रकार की फीस पर रोक लगाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि राज्यपाल ने 'द पंजाब रेगुलेशन ऑफ फी ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस, 2026' को मंजूरी दे दी है। नए प्रावधानों के तहत निजी स्कूल अब सालाना अधिकतम 5 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकेंगे। यदि कोई स्कूल इससे अधिक बढ़ोतरी करना चाहता है तो उसे नियामक संस्था से पूर्व अनुमति लेनी होगी।
सरकार के अनुसार, नए संशोधन का उद्देश्य निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की फीस वृद्धि पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना, अभिभावकों और छात्रों को मनमानी बढ़ोतरी से बचाना और फीस संरचना में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
भगवंत मान ने किया था एलान
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 3 जून को फीस वृद्धि को 5 प्रतिशत तक सीमित करने की घोषणा की थी, जबकि 22 जून को पंजाब कैबिनेट ने इस संबंध में अध्यादेश को मंजूरी दे दी थी।
