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विदेशों में डेलिगेशन भेजना निरर्थक कवायद, ट्रंप के दावे पर संसद में जवाब दें प्रधानमंत्री, कांग्रेस का सरकार पर निशाना

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने एक फ़िर यह दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य तनाव को व्यापार समझौते के जरिए सुलझाया है। इसे लेकर जयराम रमेश ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री अपने करीबी दोस्त द्वारा बार-बार किए जा रहे इन दावों पर पूरी तरह मौन हैं।

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जयराम रमेश का केंद्र सरकार पर हमला

Photo : PTI

Jairam Ramesh: कांग्रेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान को लेकर फिर सरकार को निशाने पर लिया है। कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुप्पी साधने के बजाय संसद का विशेष सत्र बुलाकर सदन के पटल पर स्पष्टीकरण देना चाहिए और सभी दलों के नेताओं से भी बातचीत करनी चाहिए। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि सांसदों के प्रतिनिधिमंडलों को विभिन्न देशों के दौरे पर भेजना दिखावे की निरर्थक कवायद है और फिलहाल यह जरूरी है कि पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर को रोके जाने से जुड़े सवालों का सरकार जवाब दे और संसद से एक सामूहिक संकल्प दुनिया के सामने रखा जाए।

ट्रंप ने फिर किया भारत-पाक सीजफायर पर दावा

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने एक फ़िर यह दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य तनाव को व्यापार समझौते के जरिए सुलझाया है। उन्होंने बुधवार को दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा से व्हाइट हाउस में मुलाकात के दौरान यह दावा किया। रमेश ने कहा, हमारे प्रधानमंत्री अपने करीबी दोस्त द्वारा बार-बार किए जा रहे इन दावों पर पूरी तरह मौन हैं। विदेश मंत्री जयशंकर भी अपने मित्र, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा दिए गए बयानों पर पूरी तरह खामोश हैं। रुबियो ने तो यहां तक दावा किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी तटस्थ स्थान पर बातचीत होगी। जब हम प्रतिनिधिमंडलों को दुनिया भर में भेज रहे हैं तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने आठवीं बार इस तरह का दावा किया है...अब तो भारत और पाकिस्तान को बराबरी पर रखा जा रहा है।

जयराम रमेश ने किए दावे

रमेश ने यह दावा भी किया कि कुछ खबरों में कहा गया है कि पहलगाम आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार ये आतंकवादी कुछ महीने पहले हुए तीन आतंकी हमलों में भी शामिल थे। वे पहलगाम से पहले पुंछ, गांदरबल और गुलमर्ग में आतंकी हमले कर चुके थे। उन्होंने कहा, पिछले 18 महीने से इन आतंकवादियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। भारतीय सशस्त्र बल और पुलिस उन्हें पकड़ने में सक्षम हैं, लेकिन सरकार को स्पष्टीकरण देना होगा कि क्या ये आतंकवादी पहले की तीन घटनाओं में शामिल समूह का हिस्सा थे और यदि ऐसा है तो वो खुले क्यों घूम रहे थे? रमेश ने यह मांग फिर दोहराई कि 1999 में कारगिल युद्ध के बाद बनी समीक्षा समिति की तर्ज पर पहलगाम आतंकी हमले, उसके बाद के घटनाक्रमों और ऑपरेशन सिंदूर रोके जाने की पृष्ठभूमि में भी एक समीक्षा समिति का गठन होना चाहिए।

विपक्षी नेताओं के साथ बैठक करने की सलाह

उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मोदी को सबसे पहले विपक्षी नेताओं के साथ बैठक करनी चाहिए। इसे सार्वजनिक करने की आवश्यकता नहीं है। वह उनसे व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से बात कर सकते हैं। वह विपक्षी नेताओं से मिलने से क्यों कतरा रहे हैं? उन्हें जल्द से जल्द संसद का सत्र बुलाना चाहिए और 22 फरवरी 1994 के प्रस्ताव को दोहराना चाहिए। चीन पाक जुगलबंदी उस प्रस्ताव के बाद हुई है। रमेश ने दावा किया कि दूसरे देशों में प्रतिनिधिमंडल भेजना दिखावे की निरर्थक कवायद है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, भारत और पाकिस्तान के पास वेपन ऑफ मास डिस्ट्रक्शन (जनसंहारक हथियार) हैं। लेकिन मोदी सरकार के पास ‘वेपन ऑफ मास डिस्ट्रैक्शन’ (ध्यान भटकाने का हथियार) भी है। प्रतिनिधिमंडलों को भेजना भी वेपन ऑफ मास डिस्ट्रैक्शन की कवायद है। रमेश ने दावा किया कि भाजपा मुख्यालय से वेपन ऑफ मास डिफेमेशन (बदनाम करने के हथियार) का उपयोग किया जाता है। (पीटीआई इनपुट)

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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