देश

'भारत छोड़ो आंदोलन' ने जगाई देशभक्ति की 'चिनगारी', स्वतंत्रता सेनानियों को PM ने दी श्रद्धांजलि

इस आंदोलन की पृष्ठभूमि में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत को बिना परामर्श के युद्ध में झोंकना, क्रिप्स मिशन की विफलता, और ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियाँ थीं। आंदोलन के दौरान गांधीजी, नेहरू, सरदार पटेल सहित कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन जनता ने आंदोलन को जारी रखा।

Image

भारत छोड़ों आंदोलन के स्वतंत्रता सेनानियों को पीएम ने दी श्रद्धांजलि। तस्वीर-ANI

Quit India Movement : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 83वीं वर्षगांठ पर इसमें भाग लेने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके साहस ने देशभक्ति की ऐसी चिनगारी जलाई जिसने स्वतंत्रता की ललक में असंख्य लोगों को एकजुट किया। उन्होंने कहा, ‘हम उन सभी बहादुर लोगों को गहरी कृतज्ञता के साथ याद करते हैं, जिन्होंने बापू के प्रेरक नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया।’

महात्मा गांधी ने आंदोलन का नेतृत्व किया

मोदी ने कहा, ‘उनके साहस ने देशभक्ति की एक चिनगारी जलाई जिसने स्वतंत्रता की ललक में अनगिनत लोगों को एकजुट किया।’ महात्मा गांधी ने 1942 में ब्रिटिश शासन को हटाने का आह्वान करते हुए आंदोलन शुरू किया था, जिसके परिणामस्वरूप औपनिवेशिक शासकों ने कांग्रेस के लगभग पूरे नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया था।

स्वतंत्रता संग्राम का निर्णायक चरण

भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक चरण था। इसकी शुरुआत 8 अगस्त 1942 को मुंबई के ग्वालिया टैंक मैदान (अब अगस्त क्रांति मैदान) में महात्मा गांधी ने की। गांधीजी ने 'करो या मरो' का नारा देते हुए अंग्रेजों से भारत छोड़ने की मांग की। इस आंदोलन की पृष्ठभूमि में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत को बिना परामर्श के युद्ध में झोंकना, क्रिप्स मिशन की विफलता, और ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियाँ थीं। आंदोलन के दौरान गांधीजी, नेहरू, सरदार पटेल सहित कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन जनता ने आंदोलन को जारी रखा।

स्वतंत्रता संग्राम को दी नई दिशा

इस आंदोलन में किसानों, मजदूरों, छात्रों और महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी की। कई स्थानों पर हिंसक घटनाएँ भी हुईं, जिससे ब्रिटिश प्रशासन ने कठोर दमनकारी कदम उठाए। हालांकि आंदोलन अपने तत्काल उद्देश्यों में सफल नहीं हो पाया, लेकिन इसने ब्रिटिश सरकार को यह एहसास दिलाया कि अब भारत पर शासन करना संभव नहीं है। भारत छोड़ो आंदोलन ने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी और 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

और पढ़ें
End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!