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पीएम मोदी डुप्लिकेट OBC हैं, सीएम रहते अपनी जाति को ओबीसी में किया था शामिल, जदयू अध्यक्ष का आरोप

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  • Updated Oct 15, 2022, 05:33 PM IST

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी (PM Modi) को डुप्लिकेट OBC बताया। उन्होंने कहा कि वह कभी ओबीसी की जाति के लिस्ट में नहीं थे। जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री बने तब उन्होंने अपनी जाति को ओबीसी की लिस्ट में शामिल कर दिया।

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जदयू अध्यक्ष ललन सिंह ने पीएम मोदी की जाति पर उठाए सवाल

Photo : Twitter

पटना (बिहार) : जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह (Lalan Singh) ने पीएम नरेंद्र मोदी की जाति (PM Modi caste) पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी (PM Modi) जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान अपनी जाति को OBC लिस्ट में जोड़ा था। जदयू पार्टी के सदस्यों को संबोधित करते हुए सिंह ने शुक्रवार को कहा कि 2014 में, नरेंद्र मोदी ने देश में घूमते हुए कहा कि वह अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) से हैं। गुजरात में कोई EBC नहीं है, केवल OBC है। जब मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तब उन्होंने अपनी जाति को OBC की लिस्ट में शामिल कर दिया। वह डुप्लिकेट ओबीसी हैं, असली नहीं हैं।

साथ ही ललन सिंह ने कहा कि खेद किस लिए? मैंने कौन सा गलत शब्द इस्तेमाल किया? 'बहुरूपी', 'ढोंगी' असंसदीय भाषा किस शब्दकोश में हैं? आप किसी ऐसे व्यक्ति को क्या कहेंगे जो अलग-अलग रूप लेता है और गलत तथ्य प्रस्तुत करके लोगों को गुमराह करने की कोशिश करता है। मैंने असंसदीय भाषा का इस्तेमाल नहीं किया।

ललन सिंह का बयान देश के गरीबों और पिछड़ों का अपमान है- रवि शंकर प्रसाद

पीएम मोदी के दिए गए ललन सिंह के विवादित बयान पर बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने पलटवार किया है। ललन सिंह के बयान पर आपत्ति जताते हुए रविशंकर प्रसाद ने पूछा है कि क्या नीतीश कुमार उनके राष्ट्रीय का पीएम मोदी पर इस तरह के बयान का समर्थन करते हैं। रवि शंकर प्रसाद ने ललन सिंह के बयान को देश के गरीबों और पिछड़ों का अपमान बताया है। रवि शंकर प्रसाद ने हमला करते हुए कहा कि ललन सिंह का बयान सामंतवादी सोच है और इसका जवाब देश की जनता देगी। PM मोदी के बारे में ऐसी भाषा का प्रयोग करना शर्मनाक है,नीतीश कुमार जी से मैं पूछूंगा कि आपके राष्ट्रीय अध्यक्ष की यही शालीनता है? आज तक आजाद भारत के इतिहास में किसी ने PM के बारे में इस तरह की बात नहीं की। ये देश के गरीबों और पिछड़ों का अपमान है।

पीएम मोदी ने कभी चाय नहीं बेची, उन्हें चाय बनाने भी नहीं आती

बीजेपी को 'गंदी जगह' बताते हुए ललन सिंह ने कहा कि बीजेपी छोड़कर जदयू में शामिल होने वालों ने अच्छा काम किया है। जदयू नेता ने बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि महंगाई पर कभी चर्चा नहीं होती, लेकिन चीता पर चर्चा होती है। क्या चीता भूखा रहेगा? रोजगार खत्म हो गया है। केंद्र सरकार का महंगाई पर कोई नियंत्रण नहीं है। पीएम मोदी ने कभी चाय नहीं बेची, क्या उन्हें चाय बनाना भी आता है।

ललन सिंह के करीबी सहयोगी के ठिकानों पर आईटी के छापे

गौर हो कि इनकम टैक्स (आईटी) विभाग ने शुक्रवार को पटना में कई स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें शिवपुरी, पटेल नगर और बिल्डर गब्बू सिंह के बोरिंग रोड परिसर शामिल हैं। बिल्डर गब्बू सिंह जदयू प्रमुख ललन सिंह के करीबी सहयोगी हैं।

नीतीश कुमार ने बीजेपी से नाता तोड़ महागठबंधन की बनाई सरकार

बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू नेता नीतीश कुमार द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ नाता तोड़ने और राज्य में महागठबंधन से गठबंधन बनाने के लिए विपक्ष के साथ हाथ मिलाने और बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में आठवीं बार शपथ ली। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी-जदयू ने गठबंधन में चुनाव जीता था और बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया गया था।

महागठबंधन में सात पार्टियां

दो साल से भी कम समय में, नीतीश कुमार ने अपनी पसंद बदल दी और बिहार में 'महागठबंधन' सरकार बनाने के लिए आरजेडी और कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के लिए एक आश्चर्यजनक कदम उठाया। नीतीश कुमार के इस कदम से राज्य में राजनीतिक परिदृश्य बदल गया है। बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ दिया और आरजेडी के साथ सरकार बनाने का दावा पेश किया। महागठबंधन में जदयू, आरजेडी, कांग्रेस, भाकपा (माले), भाकपा और माकपा शामिल हैं और 243 सदस्यीय सदन में उनकी कुल संख्या 160 से अधिक है।

रामानुज सिंह
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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