Election Commission Row: मध्य प्रदेश के इंदौर में एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा (Pawan Khera Attack EC) ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar Resignation) पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़े विवाद और मीडिया में आई एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए खेड़ा ने आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि आज के भारत में चुनाव आयोग आम नागरिकों और खास लोगों के साथ अलग-अलग व्यवहार कर रहा है।
पवन खेड़ा ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से जुड़े एक मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि जब किसी बड़े नेता या मुख्यमंत्री की समस्या आती है, तो उसे महज दो मिनट में सुलझा लिया जाता है। लेकिन अगर किसी साधारण सब्जी बेचने वाले को आयोग का नोटिस मिलता है, तो क्या उसकी सुनवाई इतनी ही तेजी से होगी? बिल्कुल नहीं। कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनाव आयोग की नजर में हर नागरिक बराबर नहीं रह गया है और इस व्यवस्था ने देश में 'दो तरह के नागरिक' पैदा कर दिए हैं।
चुनाव आयोग के भीतर सब कुछ नहीं चल रहा ठीक-पवन खेड़ा
इसके साथ ही उन्होंने मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर गहरा चिंता जताई। खेड़ा ने कहा कि पहले वोटर लिस्ट की एक पवित्रता और मर्यादा होती थी, जिसे अब पूरी तरह से दूषित कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्टों के हवाले से उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। अन्य दो चुनाव आयुक्तों ने कई मुद्दों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन्हें नजरअंदाज कर अपनी मर्जी से आयोग चलाने की कोशिश की।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की साख खत्म-कांग्रेस नेता
पवन खेड़ा ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की साख पूरी तरह खत्म हो चुकी है। उन्हें राहुल गांधी की सलाह मानते हुए अपने पद से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए और इस मामले में सरकारी गवाह बन जाना चाहिए। उन्होंने आक्रामक अंदाज में कहा कि अब देश की राजनीतिक स्थिति बदल चुकी है और सत्ता में बैठे लोगों का जनसमर्थन घट रहा है।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को नोटिस मिलने पर भी तंज कसा और कहा कि पहले उन्हें मार्गदर्शक मंडल में भेजा गया और अब नोटिस दिया जा रहा है। दूसरी तरफ, पूरे विवाद पर चुनाव आयोग का कहना है कि किसी भी संवैधानिक संस्था में विचारों का अंतर होना एक सामान्य प्रक्रिया है और आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से ही लिए जाते हैं।
