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जब मुट्ठी भर नमक से हिल गई थी ब्रिटिश हुकूमत की नींव; दांडी मार्च के नायकों को 95वीं वर्षगांठ पर देश ने दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष ने 95वीं वर्षगांठ पर दांडी मार्च के नायकों को श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने कहा, महात्मा गांधी के नेतृत्व में, इस मार्च ने आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता के लिए एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन को प्रज्वलित किया। दांडी मार्च, या नमक सत्याग्रह, महात्मा गांधी द्वारा गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती आश्रम से तटीय गाँव दांडी तक आयोजित किया गया था।

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महात्मा गांधी ने जब दांडी मार्च का नेतृत्व किया।

Dandi March: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को ऐतिहासिक दांडी मार्च के 95वीं वर्षगांठ पर इसके प्रतिभागियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि दांडी मार्च के प्रतिभागियों का साहस, बलिदान और सत्य और अहिंसा के प्रति प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

पीएम मोदी ने दांडी मार्च के नायकों को दी श्रद्धांजलि

एक्स पर एक पोस्ट में, पीएम मोदी ने कहा, 'आज, हम उन सभी को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने ऐतिहासिक दांडी मार्च में भाग लिया, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक अध्याय है। महात्मा गांधी के नेतृत्व में, इस मार्च ने आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता के लिए एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन को प्रज्वलित किया। दांडी मार्च में भाग लेने वाले सभी लोगों का साहस, बलिदान और सत्य और अहिंसा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।'

प्रल्हाद जोशी ने दांडी मार्च को बताया ऐतिहासिक

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी दांडी मार्च का सम्मान करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया। जोशी ने एक्स पर कहा, 'इस दांडी मार्च दिवस पर, हम औपनिवेशिक शासन के खिलाफ महात्मा गांधी के निडर रुख का सम्मान करते हैं। उनके ऐतिहासिक नमक मार्च ने एक ऐसे आंदोलन को जन्म दिया जिसने भारत की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की लड़ाई को मजबूत किया।'

'सबसे मजबूत रुख के रूप में किया जाएगा याद'

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दांडी मार्च की 95वीं वर्षगांठ पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और इसे ब्रिटिश उत्पीड़न के खिलाफ 'सबसे मजबूत रुखों में से एक' कहा। हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर कहा, 'इस दिन 1930 में, पूज्य बापू ने अंग्रेजों द्वारा लगाए गए दमनकारी नमक कर के विरोध के रूप में दांडी मार्च शुरू किया था। यह बहादुरी भरा कार्य, जिसने अंततः हजारों लोगों को प्रेरित किया, हमेशा उत्पीड़कों के खिलाफ सबसे मजबूत रुख के रूप में याद किया जाएगा।'

गांधी ने मुट्ठी भर नमक से ब्रिटिश हुकूमत की हिला दी थी नींव

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी महात्मा गांधी और सभी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, 'आज से ठीक 95 साल पहले महात्मा गांधी ने ऐतिहासिक दांडी मार्च की शुरुआत की थी और मुट्ठी भर नमक से ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी। नमक सत्याग्रह से शुरू हुआ सविनय अवज्ञा का देशव्यापी आंदोलन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 'पूर्ण स्वराज' के संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। कांग्रेस पार्टी आज भी बापूजी के सिद्धांतों पर चल रही है। बापूजी की शिक्षाएं और सत्याग्रह आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने 1930 में थे। पदयात्रा करके लोगों के अधिकारों की रक्षा करना कांग्रेस का उद्देश्य रहा है और रहेगा। इस अवसर पर हम सभी स्वतंत्रता सेनानियों को उनके अतुलनीय योगदान, संघर्ष और बलिदान के लिए श्रद्धांजलि देते हैं।'

कांग्रेस ने भी दांडी मार्च की वर्षगांठ पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। एक्स पर एक पोस्ट में, कांग्रेस ने कहा, 'इस दिन, महात्मा गांधी ने प्रसिद्ध दांडी मार्च का नेतृत्व किया, जिसे नमक सत्याग्रह के रूप में भी जाना जाता है, जो साबरमती आश्रम से शुरू होकर गुजरात के दांडी तक गया था। यह मार्च स्वतंत्रता आंदोलन में एक प्रमुख मील का पत्थर था, जो सत्य और अहिंसा के आधार पर भारतीयों द्वारा आत्मनिर्भरता प्राप्त करने का प्रतीक था।'

दांडी मार्च, या नमक सत्याग्रह, महात्मा गांधी द्वारा गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती आश्रम से तटीय गांव दांडी तक आयोजित किया गया था। नमक सत्याग्रह ब्रिटिश शासन के खिलाफ महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलन का हिस्सा था। यह आंदोलन 12 मार्च, 1930 को शुरू हुआ और 5 अप्रैल, 1930 को समाप्त हुआ।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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