प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री को लेकर दिए गए बयानों से जुड़े मानहानि मामले में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। गुजरात की सत्र अदालत ने पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल और राज्यसभा सांसद संजय सिंह की अलग-अलग ट्रायल कराने की मांग को खारिज कर दिया है। दोनों ने अहमदाबाद स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एम.पी. पुरोहित की अदालत में अलग-अलग ट्रॉयल कराने की मांग वाली पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी। जिसे सोमवार को खारिज कर दिया गया। दोनों नेताओं ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी अलग-अलग सुनवाई की अर्जी पहले ही खारिज कर दी गई थी।
गुजरात विश्वविद्यालय ने दायर किया था मामला
यह आपराधिक मानहानि का मामला गुजरात विश्वविद्यालय की ओर से दायर किया गया है। विश्वविद्यालय ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर संजय सिंह और अरविंद केजरीवाल की टिप्पणियां व्यंग्यात्मक और अपमानजनक थीं, जिससे विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।
अदालत ने पुर्नविचार याचिका खारिज करते हुए दिए ये तर्क
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि केजरीवाल और संजय सिंह ने 1 और 2 अप्रैल 2023 को एक ही राजनीतिक दल के सदस्य के रूप में बयान दिए थे। अदालत ने टिप्पणी की कि दोनों के कृत्य एक समान उद्देश्य से प्रेरित थे और उनमें निरंतरता थी, इसलिए अलग-अलग ट्रायल की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। हालांकि, दोनों नेताओं ने दलील दी थी कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अलग-अलग हैं और कथित घटनाओं की तारीखें भी भिन्न हैं, इसलिए एक साथ ट्रायल गलत है। उन्होंने यह भी कहा था कि ट्रायल कोर्ट का आदेश कानूनी रूप से गलत है और उस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 500 (मानहानि) के तहत मामला बनता है। यह शिकायत गुजरात विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार पीयूष पटेल ने दर्ज कराई थी।
बता दें कि यह मामला उस समय सामने आया था, जब गुजरात हाईकोर्ट ने अप्रैल 2023 में केंद्रीय सूचना आयोग के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद केजरीवाल और संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया मंचों, खासकर एक्स (ट्विटर) पर गुजरात विश्वविद्यालय को लेकर बयान दिए थे।
