समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने पीएफआई (PFI) पर लगे बैन का विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि इस पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए था। यह मुस्लिमों की हितैषी है, इसलिए इसके खिलाफ यह एक्शन लिया गया।
बर्क ने इसके अलावा पीएफआई को सियासी पार्टी बताया। दरअसल, बुधवार (28 सितंबर, 2022) को टाइम्स नाउ नवभारत ने उनसे सवाल पूछा गया था कि मुसलमानों की पार्टी तो एआईएआईएम (AIMIM) भी है, पर उस पर तो बैन नहीं है। उन्होंने जवाब दिया- पीएफआई को मैं राजनीतिक दल मानता हूं।
हालांकि, ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शाहबुद्दीन रज़वी ने बरेली में मीडिया को बताया- सरकार ने कट्टरपंथी संगठन PFI पर प्रतिबंध लगाकर अच्छा कदम उठाया है। भारत की सरज़मीं कट्टरपंथी विचारधारा की सरज़मीं नहीं है और न यहां ऐसी कट्टरपंथी विचारधारा पनप सकती जिससे मुल्क़ की एकता-अखंडता को खतरा हो।
दरअसल, सरकार ने कथित रूप से आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता और आईएसआईएस जैसे आतंकवादी संगठनों से ‘‘संबंध’’ होने के कारण ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ (पीएफआई) व उससे संबद्ध कई अन्य संगठनों पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया है। पीएफआई और उसके नेताओं से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।
आतंकवाद रोधी कानून ‘यूएपीए’ के तहत प्रतिबंधित संगठनों में ‘रिहैब इंडिया फाउंडेशन’ (आरआईएफ), ‘कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया’ (सीएफ), ‘ऑल इंडिया इमाम काउंसिल’ (एआईआईसी), ‘नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन’ (एनसीएचआरओ), ‘नेशनल विमेंस फ्रंट’, ‘जूनियर फ्रंट’, ‘एम्पॉवर इंडिया फाउंडेशन’ और ‘रिहैब फाउंडेशन (केरल)’ के नाम शामिल हैं।
इस 16 साल पुराने संगठन के खिलाफ मंगलवार को सात राज्यों में छापेमारी के बाद 150 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया या गिरफ्तार किया गया। इससे पांच दिन पहले भी देशभर में पीएफआई से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की गई थी और करीब 100 से अधिक लोगों को उसकी कई गतिविधियों के लिए गिरफ्तार किया गया था, जबकि काफी संख्या में संपत्तियों को भी जब्त किया गया।
