National Herald Case: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने शनिवार को कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष उनकी तरफ से दलील दी गई। कांग्रेस नेता ने कहा कि इस बार हमने ईडी से कहा कि संपत्तियां बेचकर कर्ज का भुगतान क्यों नहीं किया गया? जांच एजेंसी हमें यह सलाह नहीं दे सकती। हम कोई महाजनी का कारोबार नहीं करते हैं। हमने ब्याज मुक्त कर्ज दिया ताकि अखबार के जरिए विचारधारा को प्रचारित-प्रसारित करने के जो लक्ष्य थे वे पूरे हो सकें।
कांग्रेस नेता खेड़ा ने कहा कि अगर वे लोन चुकता नहीं कर पाए तो ईडी यह सुझाव देने वाला कौन होता है कि संपत्तियां बेचकर ऋण चुकता करवा देते? हमने उस अखबार को पुनर्जीवित करने के लिए एक नॉन-प्राफिट कंपनी बनाई। हमने मांग की है कि ईडी ने जो कागजात जब्त किए हैं, उन्हें रिकॉर्ड पर लाया जाए।
नेशनल हेराल्ड मामला ‘वास्तव में अजीब’ है-सोनिया गांधी
इससे पहले कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने शुक्रवार को कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का नेशनल हेराल्ड मामला ‘वास्तव में अजीब’ है। ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू द्वारा तीन जुलाई को मामले में दायर आरोपपत्र के संज्ञान के बिंदु पर अपनी दलीलें पूरी किए जाने के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने आज अपनी बात शुरू की। सिंघवी ने कहा, ‘यह वास्तव में एक अजीब मामला है। अजीब से भी अधिक। अभूतपूर्व। यह बिना किसी संपत्ति, बिना किसी उपयोग या संपत्ति प्रयोजन के, धनशोधन का एक कथित मामला है। एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) से यंग इंडियन को एक इंच भी संपत्ति नहीं मिली। किसी भी कांग्रेस नेता को कोई संपत्ति या पैसा नहीं मिला। फिर भी इसे धनशोधन कहा जाता है।’
नेताओं पर साजिश और धनशोधन का आरोप
ईडी ने सोनिया और राहुल गांधी, दिवंगत कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस के अलावा सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और निजी कंपनी यंग इंडियन पर नेशनल हेराल्ड अखबार प्रकाशित करने वाली एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की 2,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों के धोखाधड़ी से अधिग्रहण को लेकर साजिश और धनशोधन का आरोप लगाया है। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि गांधी परिवार के पास यंग इंडियन के 76 प्रतिशत शेयर थे, जिसने 90 करोड़ रुपये के ऋण के बदले में धोखाधड़ी से एजेएल की संपत्ति हड़प ली। हालांकि, सिंघवी ने कहा कि यह कवायद एजेएल को कर्ज मुक्त बनाने के लिए की गई थी।
यंग इंडियन एक गैर-लाभकारी कंपनी-कांग्रेस
सिंघवी ने कहा, ‘हर कंपनी को कानून के तहत यह अधिकार प्राप्त है और वह हर दिन विभिन्न प्रकार के साधनों के माध्यम से अपनी कंपनी को मुक्त करती है। इसलिए आप कर्ज लेकर उसे किसी अन्य इकाई को सौंप देते हैं। इस प्रकार यह कंपनी कर्ज मुक्त हो जाती है।’ उन्होंने कहा कि यंग इंडियन एक गैर-लाभकारी कंपनी है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, ‘इसका मतलब है कि यह लाभांश नहीं दे सकती, यह भत्ते नहीं दे सकती, यह वेतन नहीं दे सकती, यह बोनस नहीं दे सकती। यह कुछ भी नहीं दे सकती।’ उन्होंने कहा कि एजेएल के शेयरों में पैसा लगाने के बाद यंग इंडियन को केवल लाभांश पर अधिकार मिला तथा एजेएल की संपत्तियों पर कोई ब्याज नहीं बनाया गया।
सिंघवी ने पूछा-एजेएल का छद्म रूप कैसे माना जा सकता है?
सिंघवी ने पूछा, ‘गांधी परिवार और यंग इंडियन को एजेएल का छद्म रूप कैसे माना जा सकता है?’उन्होंने कहा कि ईडी ने कई वर्षों तक कुछ नहीं किया और इसके बजाय एक निजी शिकायत पर कार्रवाई की। सिंघवी ने कहा कि ईडी ने सोनिया गांधी के खिलाफ ‘एक क्रूर कृत्य का आपराधिक संज्ञान’ मांगा है। उन्होंने कहा, ‘2010 में एजेएल के पुनर्गठन और 2021 में प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) के पंजीकरण के बीच 11 साल का अंतर है। इससे बड़ा अंतराल नहीं हो सकता। निजी शिकायत (सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर) और ईसीआईआर में भी आठ साल का अंतर है।’
