कितने बजे चलेगी ट्रेन?
रेल मंत्रालय ने इसके कमर्शियल संचालन की तारीख की घोषणा नहीं की है, लेकिन हाल ही में जारी एक अधिसूचना के अनुसार, यह गोरखपुर से सुबह 5.40 बजे शुरू होगी और दोपहर 12.45 बजे पाटलिपुत्र पहुंचेगी। अपनी वापसी यात्रा में यह उसी दिन दोपहर 3.30 बजे पाटलिपुत्र से शुरू होगी और रात 10.30 बजे गोरखपुर पहुंचेगी।
स्थानीय भाजपा विधायक संजीव चौरसिया ने कहा, यह ट्रेन माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बिहार के लोगों के लिए एक उपहार है, क्योंकि यह न सिर्फ यात्रा के समय को दो घंटे कम करेगी, बल्कि यात्रियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं भी प्रदान करेगी। वंदे भारत ट्रेन देश का गौरव है।
क्या-क्या खासियतें?
पाटलिपुत्र-गोरखपुर वंदे भारत ट्रेन में एलईडी डिस्प्ले पैनल हैं, जो यात्रियों को ट्रेन की स्पीड, मौजूदा और आने वाले स्टेशनों के बारे में सूचित करेंगे। इसके अलावा इसमें बायो वैक्यूम शौचालय, उन्नत सुरक्षा प्रणाली कवच है। रेल मंत्रालय के अनुसार, यह ट्रेन शनिवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन चलेगी और यह बिहार और उत्तर प्रदेश दोनों स्टेशनों को कवर करेगी।
किन-किन स्टेशनों पर रुकेगी?
इनमें हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, बापूधाम मोतिहारी, सगौली, बेतिया, नरकटियागंज और बगहा जैसे स्टेशन शामिल हैं। रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (सूचना एवं प्रचार) दिलीप कुमार ने कहा कि पाटलिपुत्र-गोरखपुर वंदे भारत सहित बिहार और उत्तर प्रदेश में कुल 28 ऐसी ट्रेनें चल रही हैं। पहली वंदे भारत के बाद, जिसे 15 फरवरी, 2019 को प्रधानमंत्री ने हरी झंडी दिखाई थी, पाटलिपुत्र-गोरखपुर 71वीं ऐसी ट्रेन है। आज वंदे भारत ट्रेनें 24 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और 330 जिलों को कवर करती हैं।
130 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड
इस ट्रेन से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में कटरा और श्रीनगर के बीच दो वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई थी। अधिकारियों ने कहा कि वंदे भारत ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं, लेकिन सभी रेल नेटवर्क पर 130 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा के कारण देश को अभी तक इसकी गति का लाभ नहीं मिल पाया है। रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि कवच सिस्टम के साथ भी यही स्थिति है, जो लोको पायलट द्वारा ब्रेक लगाने में विफल होने पर ट्रेन को स्वचालित रूप से रोक सकता है। चूंकि कवच के अन्य घटक जैसे स्टेशन कवच और ट्रैकसाइड उपकरण अभी तक नहीं लगे हैं, इसलिए हम अभी तक इसका लाभ नहीं उठा पाए हैं।
