Kerala Name Change: संसद ने केरल का नाम बदलकर 'केरलम' (Keralam) करने के प्रावधान वाले एक विधेयक को बुधवार को मंजूरी दे दी। राज्यसभा ने 'केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 पर हुई चर्चा एवं गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के जवाब के बाद इसे ध्वनिमत यानी वॉइस वोट से पारित कर दिया। लोकसभा ने इसे मंगलवार को ही पारित कर दिया था। उच्च सदन में, विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि केरल विधानसभा ने 2024 में एक संकल्प पारित कर केंद्र सरकार से अपील की थी कि संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार राज्य का नाम बदलकर केरलम करने के लिए तत्काल कदम उठाया जाए।
मलयालम भाषा में राज्य का नाम केरलम
नित्यानंद राय ने कहा, "केरल सरकार ने बताया कि मलयालम भाषा में राज्य का नाम केरलम है लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में इसे केरल दर्ज किया गया है।" उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि गुलामी के सभी प्रतीकों, संस्थानों के नामों, संकेतों या उन लोगों की मूर्तियों को हटाया जाए जो बार-बार भारतीयों के दिलों को आहत करते हैं और उन सभी चीजों, संकेतों या कार्यों को स्थापित किया जाए जो भारत की विरासत के गौरव का प्रतिनिधित्व करते हैं। चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री ने कहा कि राज्य का नाम केरल से बदलकर 'केरलम' करने का प्रस्ताव न केवल राज्य के लोगों के लिए, बल्कि सभी भारतीयों के लिए गर्व की बात है। "जब हम 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की बात करते हैं, तो हम देश की भाषाओं, संस्कृतियों, परंपराओं और कलाओं की समृद्ध विविधता का जश्न मनाते हैं। भले ही ये अलग-अलग प्रतीत हों, लेकिन साथ मिलकर वे एक संयुक्त भारत की भावना को दर्शाते हैं।"
वीर सावरकर दृढ़ संकल्प का नाम हैं
अपने जवाब के दौरान, राय ने एक विवादास्पद प्रतियोगिता में हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर के बारे में सवाल करने पर केरल सरकार द्वारा शिक्षकों के खिलाफ की गई कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। राय ने कहा, "वीर सावरकर समर्पण और त्याग का नाम हैं। वीर सावरकर दृढ़ संकल्प का नाम हैं। अगर उनके बारे में सवाल पूछने पर किसी शिक्षक को बर्खास्त कर दिया जाता है, तो इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता और यह हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है। यह विषय बहुत पीड़ादायक है।" इससे पहले विधेयक पर चर्चा के दौरान, उच्च सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने कांग्रेस सदस्य जेबी माथेर हिशाम की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। चर्चा में भाग लेते हुए हिशाम ने सवाल किया था कि गृह मंत्री अमित शाह कहां हैं?
पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर 'पश्चिम बंग' करने की मांग
नड्डा ने उनकी टिप्पणियों को कार्यवाही से हटा दिया जाना चाहिए। उस समय पीठासीन अधिकारी सास्मित पात्रा ने कहा कि जो कुछ भी विधेयक से संबंधित नहीं है, उसे रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा। चर्चा के दौरान, भाजपा के समिक भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर 'पश्चिम बंग' करने की मांग की। वर्तमान नाम को औपनिवेशिक अवशेष करार देते हुए उन्होंने नाम बदलने की मांग की। गृह राज्य मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि राज्य का नाम बदलने के लिए अब तक आए प्रस्तावों में नाम में कभी एकरूपता नहीं थी। उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार ऐसा कोई प्रस्ताव भेजती है तो मोदी सरकार उस पर निश्चित रूप से विचार करेगी।
केरल की संस्कृति की सराहना
विधेयक पर हुई चर्चा में केरल के सदस्यों ने अपनी बात मलयालम में रखी तथा केरल की संस्कृति की सराहना करते हुए इसे भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग बताया। कई सदस्यों ने ध्यान दिलाया कि यह कदम राज्य के लोगों की इच्छा के अनुरूप उठाया जा रहा है। विपक्ष के कुछ सदस्यों ने विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में अनुपस्थिति को लेकर प्रश्न उठाया। सदन के नेता जेपी नड्डा ने सरकार की ओर से स्पष्ट किया कि संविधान के अनुरूप गृह राज्य मंत्री इस विधेयक को सदन में चर्चा के लिए पेश कर सकते हैं और जवाब दे सकते हैं। चर्चा में विभिन्न दलों के कई सदस्यों ने भाग लिया। इसके अलावा, सामाजिक अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले और पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने भी चर्चा में हस्तक्षेप किया। राज्य विधानसभा ने अगस्त 2023 में इसी तरह का एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित करते हुए इसे केंद्र को भेजा था, लेकिन गृह मंत्रालय ने इसमें कुछ तकनीकी बदलावों का सुझाव दिया था। संविधान के अनुच्छेद 3 में मौजूदा राज्यों के नाम परिवर्तन का प्रावधान है। अनुच्छेद 3 के अनुसार, संसद कानून द्वारा किसी भी राज्य का नाम बदल सकती है।
