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माता-पिता अपने बच्चों को काबू में रखने में सक्षम नहीं- पुणे पोर्श कार केस में SC की बड़ी टिप्पणी, नाबालिग ने ले ली थी दो की जान

सुप्रीम कोर्ट ने पुणे पोर्श कार हादसा मामले में तीन आरोपियों को जमानत देते हुए नाबालिगों से जुड़े अपराधों में माता-पिता की जिम्मेदारी पर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि बच्चों को कार की चाबियां और मौज-मस्ती के लिए पैसे देना अस्वीकार्य है।

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पुणे पोर्श केस में आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई (फोटो- PTI)

उच्चतम न्यायालय ने 2024 में पुणे के कल्याणी नगर इलाके में हुए बहुचर्चित पोर्श कार दुर्घटना मामले में तीन आरोपियों को जमानत दे दी है। इस हादसे में दो आईटी पेशेवरों की मौत हो गई थी। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने जमानत देते हुए नाबालिगों से जुड़े ऐसे मामलों में माता-पिता की भूमिका और जिम्मेदारी पर गंभीर टिप्पणी की।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को काबू में रखने में सक्षम नहीं हैं। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नशीली दवाओं का सेवन एक अलग मुद्दा हो सकता है, लेकिन नाबालिगों को कार की चाबियां देना और मौज-मस्ती के लिए पैसा उपलब्ध कराना किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। पीठ ने कहा, ’’नशीली दवाओं का सेवन एक अलग मसला है, लेकिन उन्हें (बच्चों को) कार की चाबियां और मौज-मस्ती करने के लिए पैसे देना अस्वीकार्य है।’’

बदल दिया था खून का नमूना

यह टिप्पणी उस समय आई जब अदालत ने आरोपी अमर संतिश गायकवाड़ समेत अन्य आरोपियों को जमानत दी। गायकवाड़ पर आरोप है कि उसने एक बिचौलिए के रूप में काम करते हुए नाबालिग आरोपी के रक्त के नमूने बदलवाने के लिए अस्पताल में एक डॉक्टर के सहायक को तीन लाख रुपये की रिश्वत दी थी। अदालत ने इससे पहले 23 जनवरी को गायकवाड़ की जमानत याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब भी मांगा था।

2 लोगों की हो गई थी मौत

मामला 19 मई 2024 का है, जब कथित तौर पर शराब के नशे में धुत 17 वर्षीय नाबालिग द्वारा चलाई जा रही पोर्श कार ने दो आईटी पेशेवरों को कुचल दिया था, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इस हादसे ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था। इस केस में आदित्य अविनाश सूद (52) और आशीष सतीश मित्तल (37) को भी गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि इनके रक्त के नमूनों का इस्तेमाल जांच में दो अन्य नाबालिगों के मामलों में किया गया था, जो हादसे के समय मुख्य आरोपी के साथ कार में मौजूद थे। सुप्रीम कोर्ट ने 7 जनवरी को इन दोनों की जमानत याचिकाओं पर भी राज्य सरकार से जवाब मांगा था।

आरोपी नाबालिग को निबंध लिखने पर मिल गई थी जमानत

गौरतलब है कि इससे पहले 16 दिसंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने गायकवाड़, सूद और मित्तल सहित आठ आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। वहीं, किशोर न्याय बोर्ड द्वारा नाबालिग आरोपी को मामूली शर्तों पर जमानत दिए जाने, जिसमें सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखने की शर्त शामिल थी, को लेकर देशभर में भारी विरोध हुआ था।

कितने लोग के खिलाफ मामला

जनआक्रोश के बाद पुणे पुलिस ने किशोर न्याय बोर्ड से फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध किया, जिसके बाद नाबालिग को सुधार गृह भेजा गया। हालांकि, जून में उच्च न्यायालय ने नाबालिग को रिहा करने का आदेश दे दिया था। इस पूरे मामले में नाबालिग के माता-पिता विशाल अग्रवाल और शिवानी अग्रवाल, डॉक्टर अजय तावरे, अस्पताल के कर्मचारी अतुल घाटकांबले, आदित्य सूद, आशीष मित्तल, अरुण कुमार सिंह और दो बिचौलियों सहित कुल 10 लोगों को रक्त के नमूने बदलने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मामला अब भी न्यायिक जांच के दायरे में है और सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी ने अभिभावकों की जिम्मेदारी पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।

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शिशुपाल कुमार
शिशुपाल कुमार author

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय ... और देखें

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