देश

केवल माता-पिता की आय के आधार पर तय नहीं कर सकते OBC क्रीमी लेयर, SC का अहम फैसला, सरकार की दलील खारिज

कोर्ट ने कहा कि क्रीमी लेयर के निर्धारण में माता-पिता के पद और उनके सामाजिक-प्रशासनिक दर्जे को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। अदालत ने केंद्र सरकार की अपील खारिज करते हुए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के उन उम्मीदवारों को राहत दी, जिन्हें गलत तरीके से OBC क्रीमी लेयर मानकर नियुक्ति से रोक दिया गया था।

Image

ओबीसी क्रीमी लेयर पर एससी की टिप्पणी।

Photo : PTI

OBC creamy layer : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने एक अहम फैसले में कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का कोई उम्मीदवार क्रीमी लेयर के दायरे में आता है कि नहीं, इसका निर्धारण केवल माता-पिता की आय के आधार पर नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि क्रीमी लेयर के निर्धारण में माता-पिता के पद और उनके सामाजिक-प्रशासनिक दर्जे को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। अदालत ने केंद्र सरकार की अपील खारिज करते हुए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के उन उम्मीदवारों को राहत दी, जिन्हें गलत तरीके से OBC क्रीमी लेयर मानकर नियुक्ति से रोक दिया गया था।

माता-पिता की सामाजिक स्थिति का भी ध्यान रखना जरूरी-कोर्ट

शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि माता ओबीसी क्रीमी लेयर तय करते समय माता-पिता की सामाजिक स्थिति का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनकी आय एवं संपन्नता केवल एक पूरक कारक है। वर्तमान में जिन लोगों के परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक होती है, उन्हें आमतौर पर क्रीमी लेयर दर्जे में रखा जाता है और वे ओबीसी आरक्षण के लाभ से बाहर हो जाते हैं। अब तक ऐसे मामलों में अधिकारियों ने क्रीमी लेयर तय करने के लिए मुख्य रूप से आय की सीमा को ही आधार बनाया था।

'पदोन्नति होने का मतलब यह नहीं कि सामाजिक उन्नति भी हुई'

न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और आर. महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया कि ग्रुप A और ग्रुप B सरकारी अधिकारियों के बच्चों को स्वतः ही आरक्षण के लाभ से बाहर कर दिया जाता है, क्योंकि इन पदों की ऊंची रैंक सामाजिक रूप से पर्याप्त उन्नति का संकेत मानी जाती है। वहीं ग्रुप C और ग्रुप D कर्मचारियों के बच्चों को ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलता रहता है, भले ही परिवार की आय कुछ समय के लिए निर्धारित सीमा से ऊपर चली जाए, क्योंकि समय के साथ वेतन बढ़ने या पदोन्नति होने का मतलब यह नहीं कि समान स्तर की सामाजिक उन्नति भी हुई है।

केंद्र सरकार की दलील खारिज

केंद्र सरकार की इस दलील को खारिज करते हुए कि आय और संपत्ति का पैमाना ही एकमात्र आधार बना रहना चाहिए, अदालत ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष माना। इनमें से कई PSU कर्मचारियों के बच्चे थे, जिन्होंने इस नियम को एक दशक से अधिक समय तक चुनौती दी थी।

सरकार की क्या थी दलील?

सरकार ने 14 अक्टूबर 2004 के एक स्पष्टीकरण पत्र पर भरोसा किया, जिसमें कहा गया था कि जहां PSU के पदों और सरकारी पदों के बीच समानता तय नहीं की गई हो, वहां आय/संपत्ति परीक्षण के तहत सैलरी आय को अलग से माना जा सकता है। इसी आधार पर, जिन उम्मीदवारों के माता-पिता की आय निर्धारित सीमा से अधिक थे, उन्हें OBC आरक्षण लाभ से वंचित कर दिया गया।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

और पढ़ें
End of Article