Omar Abdullah on Indus Waters Treaty: देश आज 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को उनके ही नदी संसाधनों का इस्तेमाल करने से लंबे समय तक रोका गया और इसका नुकसान स्थानीय आबादी को उठाना पड़ा। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि “हमारा खून चूसा गया”, ये हमारी नदियां हैं और इन पर पहला अधिकार हमारा होना चाहिए था।
‘कश्मीरियों के हमदर्द होने का दावा, पानी पर कहां गई हमदर्दी?’
श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने पानी को पाकिस्तान के लिए ‘रेड लाइन’ बताया था। उमर अब्दुल्ला ने सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों के प्रति हमदर्दी का दावा करता है, लेकिन जब जम्मू-कश्मीर के नदी संसाधनों की बात आती है तो उसकी यह हमदर्दी गायब हो जाती है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की नदियों पर स्थानीय लोगों का पहला अधिकार होना चाहिए था, लेकिन उन्हें इन नदियों के पानी का पर्याप्त इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं मिली।
सिंधु जल संधि को लेकर क्या है उमर अब्दुल्ला की आपत्ति?
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सिंधु जल संधि के तहत छह नदियों में से तीन नदियां भारत को मिलीं, जबकि जम्मू-कश्मीर से जुड़ी तीन नदियों का पानी पाकिस्तान की ओर चला गया। उन्होंने दावा किया कि इस व्यवस्था का जम्मू-कश्मीर के लोगों को लंबे समय से नुकसान उठाना पड़ा है। उनके मुताबिक, चिनाब से पीने का पानी लेने, झेलम पर तुलबुल परियोजना के जरिए नौवहन बढ़ाने और बड़ी परियोजनाओं के जरिए पानी रोकने जैसी संभावनाओं का पूरा इस्तेमाल नहीं हो सका।
‘सिंधु जल संधि अब निलंबित है तो निलंबित ही रहनी चाहिए’
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित किया गया और अब इसे निलंबित ही रखा जाना चाहिए, ताकि जम्मू-कश्मीर अपने प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर सके। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को अपनी नदियों के पानी का उचित उपयोग करने का अधिकार मिलना चाहिए।
शहबाज शरीफ ने क्या कहा था?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इससे पहले सिंधु नदी के पानी को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि “पानी की हर बूंद हमारी रेड लाइन है।” उन्होंने यह भी कहा था कि अगर पाकिस्तान की जल आपूर्ति को खतरा पैदा हुआ तो इस्लामाबाद इसका सीधा जवाब देगा।
'हमारे पूर्वजों ने चुना सही रास्ता'
उमर अब्दुल्ला ने अपने दादा और जम्मू-कश्मीर के पूर्व नेता शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के संघर्ष का जिक्र करते हुए 1947 के दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय पाकिस्तानी सेना और कबायली हमलावरों के खिलाफ भारतीय सेना के पहुंचने से पहले ही स्थानीय कश्मीरियों ने मोर्चा संभाल लिया था।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उस दौर में “हमलावर खबरदार, हम कश्मीरी हैं तैयार” का नारा गूंजता था। जिन लोगों के पास हथियार थे, उन्होंने बंदूकें उठाईं, जबकि हथियार नहीं रखने वाले लोगों ने लकड़ी की नकली बंदूकों के साथ भी हमलावरों का मुकाबला किया और अपनी जान कुर्बान की।
उमर अब्दुल्ला ने मुजफ्फराबाद में मास्टर अब्दुल अजीज की हत्या का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (POJK) की स्थिति को देखकर यह स्पष्ट होता है कि उस समय कबायली हमलावरों का विरोध करने वाले उनके पूर्वजों का फैसला सही था।
