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न गोली चलेगी न मिसाइल, पलक झपकते ही दुश्मन के UAV हो जाएंगे बर्बाद, पुणे की कंपनी ने बनाया लेजर स्नाइपर वेपन

Olee.space के सह संस्थापक सुमन हीरेमठ का कहना है कि यह डाइरेक्टेड एनर्जी वेपन जो कि एआई से चलने वाला एक तरह का लेजर स्नाइपर है, यह बटन दबाते ही अपनी तरफ आने वाले खतरे को निष्क्रिय कर देगा। पुणे स्थित इस कंपनी के दूसरे को-फाउंडर जेम्स सोलोमन ने बताया कि 'दुश्मन के हथियार को खत्म करने के लिए किसी काइनेटिक हथियार को भेजने की जरूरत नहीं होगी।

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पुणे स्थित स्टार्ट-अप कंपनी ने बनाया लेजर स्नाइपर वेपन। तस्वीर-X/@ReviewVayu

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Olee Space makes Directed Energy Weapon : स्वदेशी रक्षा तकनीकी फर्म ओली स्पेस (Olee Space) जो कि एक स्टार्ट-अप है। इस फर्म ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से चलने वाले दो किलोवाट की क्षमता वाले एक लेजर सिस्टम को विकसित किया है। यह लेजर सिस्टम मानवरहित ग्राउंड व्हीकल (UGV) पर लगेगा। यह सिस्टम ड्रोन एवं UAV के हमलों के खिलाफ एक बेहद कारगर उपाय साबित होगा। कंपनी का कहना है कि इस लेजर सिस्टम की फील्ड टेस्टिंग पूरी हो गई है और अब यह अभियानगत तैनाती और बिक्री के लिए उपलब्ध है।

डाइरेक्टेड एनर्जी वेपन के रूप में काम करेगा

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यह लेजर सिस्टम नजदीकी लड़ाई और सुरक्षा घेरे में डाइरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) के रूप में काम करेगा। दुश्मन, उनके वाहनों एवं उपकरणों को चंद सेकेंड्स में निष्क्रिय और क्षतिग्रस्त करने के लिए इस लेजल सिस्टम को विकसित किया गया है। कंपनी का कहना है कि यह भविष्य के खतरों को तेज गति एवं नॉन-काइनेटिक तरीके से खत्म करेगा।

एक तरह का लेजर स्नाइपर

Olee.space के सह संस्थापक सुमन हीरेमठ का कहना है कि यह डाइरेक्टेड एनर्जी वेपन जो कि एआई से चलने वाला एक तरह का लेजर स्नाइपर है, यह बटन दबाते ही अपनी तरफ आने वाले खतरे को निष्क्रिय कर देगा। पुणे स्थित इस कंपनी के दूसरे को-फाउंडर जेम्स सोलोमन ने बताया कि 'दुश्मन के हथियार को खत्म करने के लिए किसी काइनेटिक हथियार को भेजने की जरूरत नहीं होगी।

पचाप तरीके से काम करेगा लेजर स्नाइपर

AI से चलने वाला यह लेजर स्नाइपर आकाश में कोई बुलेट फायर नहीं करेगा। यह आसमान में कोई मिसाइल नहीं छोड़ेगा। यह चुपचाप तरीके से काम करेगा।' सोलोमन ने आगे बताया कि 'खास बात यह है कि इस हथियार के इस्तेमाल में कोई लागत नहीं आएगी। दुश्मन द्वारा भेजे गए हवाई खतरों को निष्क्रिय करने के लिए जब कोई मिसाइल छोड़ी जाती है तो उसकी कीमत करीब 150,000 डॉलर बैठती है।

अब लड़ाई मशीन और मशीन के बीच की हो गई है

पांच साल पहले की अगर बात करें तो रक्षा क्षेत्र में ड्रोन को एक बड़े खतरे के रूप में नहीं लिया जाता था लेकिन आज ये एक बड़ा खतरा बन गए हैं। अब लड़ाई मशीन और मशीन के बीच की हो गई है और भारत इसके लिए पूरी तरह से तैयार नहीं था। हवाई क्षेत्र के इस खतरे से निपटने में जो एक जगह थी, उसे भरने की हमने कोशिश की है।'

फोटोनिक्स और डिफेंस इक्विपमेंट कंपनी है Olee space

Olee.space की अगर बात करें तो यह एक फोटोनिक्स और डिफेंस इक्विपमेंट कंपनी है जो अपने हथियारों एवं उपकरणों के निर्माण में लेजर पावर का इस्तेमाल कर रही है। कंपनी का पहला प्रोडक्ट FSOC-लेज़र कम्युनिकेशंस था। इसके बारे में कंपनी ने कहा कि इसने डिफेंस आर्मर में एक जरूरी कमी को पहचाना और ठीक किया।

कम्युनिकेशन दो तरह से होता है

रिपोर्ट के मुताबिक सोलोमन ने बताया कि सारा कम्युनिकेशन दो तरह से होता है, जमीन के नीचे फाइबर ऑप्टिक केबल के जरिए जो बमबारी के दायरे में आ सकता है। दूसरा रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिए। यह भी जाम हो जाता है। आपका GPS भी काम करना बंद कर देता है। यानी दुश्मन कम्युनिकेशन के आपके सभी उपकरणों को इंटरसेप्ट कर सकता है। ऐसे में आप अपने सीक्रेट (गोपनीय) संदेश नहीं भेज सकते।'

लैपटॉप के साइज का है लेजर-बेस्ड डिवाइस

कंपनी का यह लेजर-बेस्ड डिवाइस लैपटॉप के साइज का है और इसे बैकपैक में रखा जा सकता है। वे कहते हैं, 'यह सोलर पावर पर काम करता है और इसे कोई सुन नहीं सकता, जाम नहीं कर सकता, या स्पूफ नहीं कर सकता।'Olee.space 2023 में बना था, लेकिन लेजर टेक्नोलॉजी पर काम करने के लिए कई सालों की विशेषज्ञता की जरूरत पड़ी है।

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आलोक कुमार राव
आलोक कुमार राव author

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारो... और देखें

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