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ओडिशा में बीजद को बड़ा झटका, वरिष्ठ नेता ममता मोहंता ने पार्टी और राज्यसभा सदस्यता से दिया इस्तीफा

Rajya Sabha MP Mamata Mohanta resigns: ममता मोहंता ने बीजद और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देते हुए कहा कि मुझे लगता है कि बीजेडी में मेरी और मेरे समुदाय की सेवाओं की कोई आवश्यकता नहीं है। इसलिए, मैंने जनहित में यह कठोर निर्णय लिया है।

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ममता मोहंता ने दिया इस्तीफा।

Rajya Sabha MP Mamata Mohanta resigns: ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजद) को बड़ा झटका लगा है। कुडुमी समुदाय की प्रमुख नेता और बीजद की राज्यसभा सांसद ममता मोहंता ने राज्यसभा और पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने तत्काल प्रभाव से उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इसकी जानकारी ममता मोहंता ने एक्स पर दी।

ममता मोहंता ने सोशल मीडिया पर लिखा, मैं मयूरभंज के लोगों की सेवा करने और ओडिशा के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का अवसर देने के लिए ईमानदारी से आभार व्यक्त करती हूं। हालांकि, मुझे लगता है कि बीजेडी में मेरी और मेरे समुदाय की सेवाओं की कोई आवश्यकता नहीं है। इसलिए, मैंने जनहित में यह कठोर निर्णय लिया है।

नवीन पटनायक के नाम लिखा पत्र

मोहंता ने अपना इस्तीफा बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक को सौंपा। पार्टी अध्यक्ष नवीन पटनायक के नाम अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा, आदरणीय महोदय, मैं, 31 जुलाई, 2024 को बीजू जनता दल की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देती हूं। मैं मयूरभंज के लोगों की सेवा करने और राष्ट्रीय स्तर पर ओडिशा के मुद्दे को उठाने का अवसर देने के लिए आपका तहे दिल से आभार व्यक्त करती हूं। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि बीजू जनता दल में मेरी और मेरे समुदाय की सेवाओं की कोई आवश्यकता नहीं है। इसलिए, मैंने जनहित में यह कठोर निर्णय लिया है। मैं आपसे मेरा इस्तीफा स्वीकार करने का अनुरोध करती हूं। बता दें कि ममता मोहंता अप्रैल 2020 को राज्यसभा सांसद के रूप में निर्वाचित हुई थीं। उनके इस्तीफे के पीछे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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