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PM मोदी ने ऐसे संवार दिया राहुल गांधी का घर? नींव कांग्रेस नेता ने रखी और पूरा किया प्रधानमंत्री ने

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  • Updated Jan 19, 2023, 04:07 PM IST

Amethi AK 203: अमेठी की फैक्ट्री की नींव इसलिए रखी गई थी कि सेना को आधुनिक हथियार मिल पाएं, लेकिन यूपीए के राज में ऐसा नहीं हो पाया। 2007 में नींव रखी गई और 2013 में जाकर वहां सिर्फ पंप एक्शन गन यानी PAG गन बनने शुरू हुए। ये गन सेना के लिए नहीं बल्कि राज्यों की पुलिस के लिए थी।

Amethi AK 203: फ्री की पॉलिटिक्स करना तो बहुत आसान है। जमीन पर काम करना बहुत मुश्किल है। फ्री की पॉलिटिक्स तभी होती है जब जमीन पर काम नहीं होता। कांग्रेस इस फ्री पॉलिटिक्स पर इसलिए आई क्योंकि उसके जमाने के जो प्रोजेक्ट है, उनकी डिलिवरी आज नरेंद्र मोदी के जमाने में हो रही है। आज आपको अमेठी की बात बताता हूं, जो कभी राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र था।

2007 में राहुल ने रखी फैक्ट्री की नींव

अमेठी की फैक्ट्री में आज की डेट में सेना के लिए AK 203 राइफल्स बनाई जा रही है। और दो महीने बाद AK 203 राइफल्स की पहली खेप सेना को मिल जाएगी। अब सुनिए कि जिस फैक्ट्री में आज AK 203 राइफल्स बनकर सेना को मिलने वाली हैं। उस फैक्ट्री का शिलान्यास तब हुआ था, जब राहुल गांधी अमेठी के सांसद थे। टाइमलाइन देखिए कि 2007 में सेना को आधुनिक हथियार मुहैया कराने के लिए अमेठी फैक्ट्री की नींव रखी गई थी। नींव राहुल गांधी ने रखी थी। लेकिन सेना के लिए हथियार तब बनने शुरू हुए जब मोदी ने 2019 में AK-203 बनाने के लिए शिलान्यास किया

सेना को हथियार मिलने शुरू हुए

अब मार्च 2023 में 5000 के करीब AK-203 की पहली खेप अमेठी की फैक्ट्री से सेना को मिलने वाली है। मतलब नरेंद्र मोदी ने डिलिवर करके दे दिया। यानी जो काम राहुल गांधी के हाथों शुरू करवाया गया था, वो कांग्रेस के राज में हो नहीं पाया, और उसे नरेंद्र मोदी ने आकर पूरा किया और सेना को हथियार मिलना शुरू हुए।

जमीन का अधिग्रहण 2017 में जाकर पूरा हुआ

अमेठी की फैक्ट्री की नींव इसलिए रखी गई थी कि सेना को आधुनिक हथियार मिल पाएं, लेकिन यूपीए के राज में ऐसा नहीं हो पाया। 2007 में नींव रखी गई और 2013 में जाकर वहां सिर्फ पंप एक्शन गन यानी PAG गन बनने शुरू हुए। ये गन सेना के लिए नहीं बल्कि राज्यों की पुलिस के लिए थी। यानी सेना के लिए हथियार बनाने वाली फैक्ट्री में पुलिस के लिए हथियार बनने लगे। हो सकता है कि उस वक्त ये सोचा गया हो जब सेना के लिए हथियार नहीं बना पा रहे हैं तो कुछ भी हथियार बना देते हैं। 2014 में जब मोदी सरकार आई तब तक मूल प्रोजेक्ट के लिए पूरी जमीन भी अधिग्रहित नहीं हुई थी। जमीन का अधिग्रहण 2017 में जाकर पूरा हुआ।

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