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'नाम' की सियासत: नेहरू मेमोरियल अकेला नहीं... PM Modi के कार्यकाल में बदले गए इतने नाम, देखें पूरी लिस्ट

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 17, 2023, 01:58 PM IST

Nehru Memorial Renaming: पीएम मोदी के नौ साल के कार्यकाल में कई योजनाओं व स्थानों के नामों में बदलाव किया है। इसमें राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से लेकर राजपथ और मुगल गार्डन भी शामिल है।

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नरेंद्र मोदी

Nehru Memorial Renaming: केंद्र सरकार ने दिल्ली स्थित नेहरू मेमोरियल का नाम बदल दिया है। अब नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी अपने नए नाम प्रधानमंत्री म्यूजियम एंड सोसाइटी के नाम से जाना जाएगा। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद एक बार फिर भाजपा बनाम कांग्रेस की लड़ाई शुरू हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि नाम के बदलाव के बीच भाजपा की संकीर्ण सोच और प्रतिशोध की भावना है।

कांग्रेस का कहना है कि भाजपा देश की विरासत और इसके इतिहास को बदलना चाहती है। पार्टी के कई नेताओं समेत विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी भाजपा के इस फैसले पर हमला बोला है। हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं है जब भाजपा सरकार में किसी परियोजना या स्थान का नाम बदला गया हो।

पीएम मोदी के नौ साल के कार्यकाल में कई योजनाओं व स्थानों के नामों में बदलाव किया है। इसमें राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से लेकर राजपथ और मुगल गार्डन भी शामिल है। आइए जानते हैं उन प्रमुख स्थानों और परियोजनाओं के नाम, जिनके नाम भाजपा सरकार के दौरान बदले गए।

क्रम नाम पहले नाम अब
1इंदिरा आवास योजनाप्रधानमंत्री आवास योजना
2राजीव गांधी विद्युती करण योजनादीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना
3राजीव आवास योजनासरदार पटेल राष्ट्रीय शहरी आवास मिशन
4राजीव गांधी फेलोशिप योजनानेशनल फेलोशिप फॉर स्टूडेंट्स विद डिसैबिलिटीज
5राजपथकर्तव्य पथ
6मुगल गार्डनअमृत उद्यान
7राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण योजनापंचायत सशक्तिकरण योजना
8इंदिरा गांधी मातृव्य सहयोग योजनाप्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना
9अमर जवान ज्योतिसुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा
10इलाहाबादप्रयागराज
11फैजाबादअयोध्या
12औरंगाबादछत्रपति संभाजीनगर
13उस्मानाबादधाराशिव

भाजपा ने क्या कहा

नेहरू मेमोरियल का नाम बदलने के पीछे भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा है कि यह राजनीति से परे एक प्रयास है। उन्होंने कहा, कांग्रेस इस सच्चाई को स्वीकारने में अक्षम है कि एक परिवार से परे भी ऐसे नेता हैं, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा और उसका निर्माण किया है। वहीं नाम में बदलाव के पीछे भाजपा का हमेशा से तर्क रहा है कि वह भारत के खोए इतिहास को देश के सामने लाने का प्रयास कर रही है और अंग्रेजों ओर मुगल काल की गुलामी की मानसिकता से देश को बाहर निकाल रही है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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