NEET Paper leak : नीट पेपर लीक मामले में गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि '
री-एग्जामिनेशन का आदेश नहीं दे सकते-CJI
कोर्ट में याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ वकील नरेंद्र हुड्डा से प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि 'यह जाहिर अवश्य होना चाहिए कि पेपर लीक व्यवस्थित तरीके से हुआ और इससे पूरी परीक्षा प्रभावित हुई, तभी जाकर पूरी परीक्षा रद्द करने पर बात की जा सकती है। 23 लाख बच्चों में से केवल एक लाख छात्रों को दाखिला मिलेगा, ऐसे में हम री-एग्जामिनेशन का आदेश नहीं दे सकते। दोबारा परीक्षा तभी हो सकती है जब पूरी परीक्षा प्रभावित होने के पुख्ता प्रमाण मिलें।'
प्राथमिकता के आधार पर कर रहे सुनवाई-डीवाई चंद्रचूड़
सीजेआई ने इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया कि वह प्राथमिकता देते हुए नीट मामले की सुनवाई कर रहा है। गूगल बनाम सीसीआई और आयकर रिटर्न जैसे मामलों की सुनवाई आगे टालते हुए वह इस मामले को देख रहा है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि नीट पेपर लीक मामले में नतीजे का इंतजार लाखों छात्र कर रहे हैं।
सीजेआई ने सीटों की संख्या के बारे में पूछा
सीजेआई ने हुडा से देश भर में सरकारी और प्राइवेट दोनों मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या के बारे में पूछा। इस पर वरिष्ठ वकील ने बेंच को बताया कि प्राइवेट और सरकारी दोनों मिलाकर मेडिकल सीटों की संख्या 1,08000 है। महाधिवक्ता तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि सीबीआई ने कथित नीट-यूजी पेपर लीक और कदाचार की चल रही जांच के संबंध में दूसरी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है जिस पर सीजेआई ने कहा, हां हमने दूसरी स्टेट्स रिपोर्ट भी पढ़ी है।
सरकारी कॉलेज नहीं मिला
याचिकाकर्ता छात्रों के वकील ने कहा कि कुछ ऐसे छात्र भी आए हैं, जिनकी रैंक एक लाख आठ हजार छात्रों के बीच है, लेकिन उनको सरकारी कॉलेज नहीं मिला। वहीं, एनटीए ने सभी लोगों का रिजल्ट घोषित नहीं किया है, जबकि दूसरी परीक्षाओं में पूरे रिजल्ट घोषित होते है। इस पर सीजेआई चंद्रचूड़ ने पूछा कि सरकारी कॉलेजों में कितनी सीटें हैं? वकील ने कहा कि 56 हजार सीटें। कम से कम एक लाख का रिजल्ट घोषित हों।
