NCERT Removed Khalistan From Book: केंद्र सरकार की ओर से खालिस्तान को लेकर बड़ा फैसला किया गया है। एनसीईआरटी की ओर से जारी बयान के मुताबिक, 12वीं की किताबों से खालिस्तान का जिक्र हटा दिया गया है। यह फैसला शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से लिखी गई चिट्ठी के बाद लिया गया है। दरअसल, बीते महीने गुरुद्वारा कमेटी ने एनसीईआरटी को चिट्ठी लिखकर खालिस्तान का जिक्र हटाने की मांग की थी।
स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार ने बताया, एनसीईआरटी 12वीं की राजनीतिक विज्ञान की किताब में अलग खालिस्तान बनाने की मांग का जिक्र किया गया था। इस किताब में खालिस्तान समर्थकों को अलगाववादियों के तौर पर दिखाया गया है। इस चैप्टर की एक लाइन '...लेकिन इसकी व्याख्या एक अलग सिख राष्ट्र की दलील के रूप में भी की जा सकती है' को हटा दिया गया है...उसी चैप्टर में चौथे पैरा के अंतिम वाक्य से, '...और खालिस्तान का निर्माण' को हटा दिया गया है।
SGPC ने एनसीईआरटी पर लगाया था आरोप
एसजीपीसी ने एनसीईआरटी को लिखी चिट्ठी में कई आरोप लगाए थे। इस चिट्ठी में गलत सूचनाओं पर आपत्ति जताई गई थी। कहा गया था कि एनसीईआरटी ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करती है। एसजीपीसी ने कहा था कि 12वीं की पॉलिटिकल साइंस की किताब के सातवें चैप्टर में आनंदपुर साहिब रिजॉल्यूशन में लेकर खालिस्तान को लेकर गलत सूचना पेश की गई है। कमेटी ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। मांग थी कि इन तथ्यों को किताब से हटाया जाए।
विवाद की वजह क्या थी?
एनसीईआरटी की किताब के इस चैप्टर में बताया गया है कि 1973 में शिरोमणि अकाली दल ने आनंदपुर साहिब प्रस्ताव को अपनाया था। इस प्रस्ताव को अलगाववादी प्रस्ताव के रूप में पेश गया है, जिसमें क्षेत्रीय स्वायत्ता की मांग को उठाया गया है। इसमें केंद्र व राज्य के संबंधों को फिर से परिभाषित करने की मांग उठाई गई है। हालांकि, जब इसे हिंदी में पढ़ा जाता है तो ऐसा लगता है कि अलग से सिख राष्ट्र की मांग की जा रही हो।
