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खालिस्तान को लेकर NCERT का बड़ा एक्शन, 12वींं की किताब से हटाया गया 'अलग राष्ट्र की मांग' का जिक्र

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 30, 2023, 07:02 PM IST

NCERT Removed Khalistan From Book: स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार ने बताया, एनसीईआरटी 12वीं की राजनीतिक विज्ञान की किताब में अलग खालिस्तान बनाने की मांग का जिक्र किया गया है। किताब की एक लाइन '...लेकिन इसकी व्याख्या एक अलग सिख राष्ट्र की दलील के रूप में भी की जा सकती है' को हटा दिया गया है...उसी चैप्टर में चौथे पैरा के अंतिम वाक्य से, '...और खालिस्तान का निर्माण' को हटा दिया गया है।

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NCERT Removed Khalistan From Book: केंद्र सरकार की ओर से खालिस्तान को लेकर बड़ा फैसला किया गया है। एनसीईआरटी की ओर से जारी बयान के मुताबिक, 12वीं की किताबों से खालिस्तान का जिक्र हटा दिया गया है। यह फैसला शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से लिखी गई चिट्ठी के बाद लिया गया है। दरअसल, बीते महीने गुरुद्वारा कमेटी ने एनसीईआरटी को चिट्ठी लिखकर खालिस्तान का जिक्र हटाने की मांग की थी।

स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार ने बताया, एनसीईआरटी 12वीं की राजनीतिक विज्ञान की किताब में अलग खालिस्तान बनाने की मांग का जिक्र किया गया था। इस किताब में खालिस्तान समर्थकों को अलगाववादियों के तौर पर दिखाया गया है। इस चैप्टर की एक लाइन '...लेकिन इसकी व्याख्या एक अलग सिख राष्ट्र की दलील के रूप में भी की जा सकती है' को हटा दिया गया है...उसी चैप्टर में चौथे पैरा के अंतिम वाक्य से, '...और खालिस्तान का निर्माण' को हटा दिया गया है।

SGPC ने एनसीईआरटी पर लगाया था आरोप

एसजीपीसी ने एनसीईआरटी को लिखी चिट्ठी में कई आरोप लगाए थे। इस चिट्ठी में गलत सूचनाओं पर आपत्ति जताई गई थी। कहा गया था कि एनसीईआरटी ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करती है। एसजीपीसी ने कहा था कि 12वीं की पॉलिटिकल साइंस की किताब के सातवें चैप्टर में आनंदपुर साहिब रिजॉल्यूशन में लेकर खालिस्तान को लेकर गलत सूचना पेश की गई है। कमेटी ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। मांग थी कि इन तथ्यों को किताब से हटाया जाए।

विवाद की वजह क्या थी?

एनसीईआरटी की किताब के इस चैप्टर में बताया गया है कि 1973 में शिरोमणि अकाली दल ने आनंदपुर साहिब प्रस्ताव को अपनाया था। इस प्रस्ताव को अलगाववादी प्रस्ताव के रूप में पेश गया है, जिसमें क्षेत्रीय स्वायत्ता की मांग को उठाया गया है। इसमें केंद्र व राज्य के संबंधों को फिर से परिभाषित करने की मांग उठाई गई है। हालांकि, जब इसे हिंदी में पढ़ा जाता है तो ऐसा लगता है कि अलग से सिख राष्ट्र की मांग की जा रही हो।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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