Times Now Survey: कांग्रेस, आप, बीआरएस, टीएमसी ये वो पार्टियां हैं, जो 2024 में विपक्षी एकता के लिए कभी अकेले तो कभी कांग्रेस की छतरी के नीचे प्रयास करते दिखी हैं। हाल के दिनों में लगभग सभी विपक्षी पार्टियां एकजुट होने के लिए तैयार भी दिखी, लेकिन क्या इस विपक्षी एकता से बीजेपी को घबराने की जरूरत है या फिर पीएम मोदी का चेहरा ही बीजेपी के लिए काफी है? टाइम्स नाउ नवभारत और ईटीजी रिसर्च के सर्वे में लोगों ने इसके दिलचस्प जवाब दिए हैं।
वोट शेयर और सीट संख्या पर नजर
2024 के आम चुनाव से पहले लोगों के मूड के आधार पर जो आंकड़े सामने आए हैं उसके मुताबिक बीजेपी का वोट शेयर 38.2 फीसद, कांग्रेस 28.7 फीसद और अन्य के खाते में 33 फीसद जाते हुए नजर आ रहे हैं। वहीं सीटों में बदलाव कुछ इस तरह है, बीजेपी गठबंधन के खाते में 292 से लेकर 338 सीट, कांग्रेस गठबंधन के खाते में 106 से लेकर 144 सीट, टीएमसी गठजोड़ के खाते में 20 से 22 सीट , वाईएसआरपी के खाते में 24 से 25 सीट, बीजेडी के खाते में 11 से 13 सीट और अन्य के खाते में 50 से 80 सीटें जाती हुई नजर आ रही है।
| पार्टी/ गठबंधन | सीटों की संख्या |
| बीजेपी गठबंधन | 292-338 |
| कांग्रेस गठबंधन | 106-144 |
| टीएमसी गठजोड़ | 20-22 |
| वाईएसआर | 24-25 |
| बीजेडी | 11-13 |
| अन्य | 50 से 80 |
क्या मिला जवाब
टाइम्स नाउ नवभारत और ईटीजी रिसर्च के सर्वे में लोगों ने साफ संदेश दिया है कि विपक्षी एकता से 2024 में बीजेपी को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। लोगों से जब पूछा गया कि अगर 2024 से पहले विपक्ष एकजुट होता है,तो PM मोदी को टक्कर दे पाएगा? इस सवाल के जवाब में 49 प्रतिशत जनता का कहना है कि 2024 में इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। वहीं 19 प्रतिशत लोगों को मानना है कि काफी हद तक विपक्ष टक्कर दे सकता है। वहां 15 प्रतिशत लोगों का मानना है कि पहले विपक्ष एक तो हो, वहीं 17 प्रतिशत लोग मानते हैं कि 2024 के चुनाव से पहले विपक्ष एक भी होगा और टक्कर भी देगा।
सबसे मजबूत चेहरा
2024 में प्रधानमंत्री का सबसे मजबूत चेहरे को लेकर जब लोगों से सवाल पूछा गया तो यहां पीएम मोदी के आस-पास कोई नहीं दिखा। हां दूसरे नंबर के लिए जरूर राहुल गांधी और केजरीवाल के बीच लड़ाई दिखी। इस सवाल के जवाब में 64 प्रतिशत जनता ने पीएम मोदी को ही सबसे मजबूत चेहरा माना। राहुल गांधी के साथ 13 प्रतिशत तो अरविंद केजरीवाल के साथ 12 प्रतिशत लोग गए। वहीं नीतीश कुमार को 6 प्रतिशत लोगों का साथ मिला तो केसीआर के साथ 5 प्रतिशत लोग गए।
