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कौन है नरेश मीणा? जिसने SDM को मारा थप्पड़, जिसके बाद जल उठा राजस्थान का समरावता गांव

Naresh meena Thappad Kand: नरेश मीणा कांग्रेस नेता सचिन पायलट का बड़ा समर्थक माना जाता है। राजस्थान की देवली उनियारा सीट पर हुए उपचुनाव में नरेश मीणा टिकट मांग रहे थे। हालांकि, टिकट नहीं मिलने पर वह बागी हो गए और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा दाखिल कर दिया।

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नरेश मीणा थप्पड़ कांड। (साभार-सोशल मीडिया)

Naresh meena Thappad Kand: राजस्थान की देवली उनियारा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में एक थप्पड़ की गूंज अब पूरे देश में सुनाई दे रही है। यहां निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा ने समरावता गांव के मतदान केंद्र में घुसकर एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ जड़ दिया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। थप्पड़ कांड के बाद नरेश मीणा की गिरफ्तारी हुई, जिससे उनके समर्थक भड़क गए।

मामला इतना बढ़ा कि नरेश मीणा के समर्थकों ने पुलिस पर ही हमला बोल दिया, जिससे समरावता गांव में हालात बिगड़ गए। नरेश मीणा के समर्थकों ने जमकर पथराव और आगजनी की और पुलिस की कई गाड़ियां व मोटर साइकिलों को फूंक दिया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को पुलिस को आंसू गैस के गोले तक दागने पड़े। बताया जा रहा है कि इस हंगामे के बीच निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा पुलिस कस्टडी से ही फरार हो गए। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। अजमेर पुलिस महानिरीक्षक ओमप्रकाश ने बताया कि गांव में भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, देवली उनियारा विधानसभा सीट पर मतदान के दौरान नरेश मीणा ने समरौता इलाके में मतदान केंद्र में जबरन घुसने की कोशिश की। शासन और पुलिस अधिकारियों ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की तो हाथापाई हो गई। मीणा ने आरोप लगाया कि एसडीएम ने तीन मतदाताओं से चोरी-छिपे वोट डलवाए। ईवीएम पर उनका चुनाव चिन्ह स्पष्ट नहीं था, जिससे उनके मतदाताओं को परेशानी हो रही थी। इस मुद्दे को लेकर नरेश मीणा और एसडीएम अमित चौधरी के बीच जमकर कहासुनी हुई, जिसके बाद नरेश मीणा ने अपना आपा खो दिया और एसडीएम को थप्पड़ जड़ दिया।

कौन हैं नरेश मीणा?

नरेश मीणा बारां जिले के छबड़ा के रहने वाले हैं। उन्हें कांग्रेस नेता सचिन पायलट का बड़ा समर्थक माना जाता है। राजस्थान की देवली उनियारा सीट पर हुए उपचुनाव में नरेश मीणा टिकट मांग रहे थे। हालांकि, टिकट नहीं मिलने पर वह बागी हो गए और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा दाखिल कर दिया। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने उनसे पर्चा वापस लेने के लिए कहा, लेकिन जब नरेश मीणा नहीं माने तो कांग्रेस ने उन्हें निष्कासित कर दिया।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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