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Bageshwar Maharaj के दरबार में मुस्लिम महिला ने अपनाया हिंदू धर्म, बोलीं- सभ्यता और संस्कार वाला है हिंदू धर्म

  • Authored by: किशोर जोशीProduced by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 22, 2023, 07:44 AM IST

Bageshwar Maharaj: बागेश्वर धाम सरकार वाले धीरेंद्र शास्त्री इन दिनों सुर्खियों में बने हुए हैं और उनकी कथा इन दिनों छत्तीसगढ़ के रायपुर में चल रही है। यहां उनके दरबार में एक मुस्लिम महिला भी पहुंची थी और उसने मंच से ही हिन्दू धर्म अपनाने की घोषणा कर दी।

KEY HIGHLIGHTS
  • धीरेंद्र शास्त्री के सामने मंच पर मुस्लिम महिला ने अपनाया हिंदू धर्म
  • मंच पर महिला ने हिंदू धर्म की तारीफ कर कहा-हिंदू धर्म से अच्छा कोई धर्म नहीं
  • हिंदू धर्म सभ्यता और संस्कार वाला धर्म है- महिला

Bageshwar Maharaj: छत्तीसगढ़ के रायपुर में इन दिनों बागेश्वर धाम वाले धीरेंद्र शास्त्री (Dheerendra Shastri) की रामकथा चल रही है। इसी दौरान रायपुर (Raipur News) में चल रही बागेश्वर धाम सरकार की कथा में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के सामने एक मुस्लिम महिला (Muslim Women) ने हिंदू धर्म को अपना लिया। इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री के मच पर घर वापसी करने वाली महिला ने मुस्लिम धर्म की खामियां गिनाई और हिंदू धर्म की जमकर तारीफ की। महिला ने कहा कि हिंदू धर्म से अच्छा कोई धर्म नहीं है, हिंदू धर्म सभ्यता और संस्कार वाला धर्म है।

बागेश्वर धाम सरकार के सवाल

इस दौरान बागेश्वर धाम सरकार के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, 'इन बहन ने अपनी इच्छा से बागेश्वर बाला जी का चमत्कार देखा, ये भी सनातन हिंदू धर्म को सर्वोपरि मानकर आना चाह रही हैं। आप बोलेंगी या हम बोले...पहले नाम बताओ और परिचय बताओ। आप हिंदू धर्म में क्यों आना चाहती हैं बहन? आपका बहन सनातन हिंदू धर्म में स्वागत है। कल बहन आपका कथा मंच से नाम करण भी करवा दिया जाएगा '

मुस्लिम महिला ने बताई वजह

वहीं हिंदू धर्म अपनाने वाली महिला ने कहा, 'मैं ये कहना चाहती हूं पहले तो मेरा नाम सुलताना है। मैं छत्तीसगढ बिलासपुर से हूं, मेरे पिता का नाम आमिर खान है और मेरे 3 भाई हैं...मेरी माता का नाम सरबरी बेगम है। मेरे घरवालों ने मुझे त्याग दिया है क्योंकि मैं मूर्ति पूजा करती हूं। बोलते हैं मुस्लिम के नाम पर तू कलंक है,मरेगी तो जहन्नुम में जाएगी। मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। मेरा मन बोलता है हिंदू धर्म से अच्छा कोई धर्म हो ही नहीं सकता है कभी, क्योंकि ये धर्म एक सभ्यता वाला धर्म है, संस्कार वाला धर्म है। इसमें भाई बहनों में शादियां नहीं होती और इसमें औरतों की जिंदगी बर्बाद नहीं होती तलाक..तलाक..तलाक बोल कर। इसमें एक बार शादी होती है और सात फेरों की जिसमें सिंदूर का महत्व होता है, मंगलसूत्र का..पूरे सोलह शृंगार का। मैं दो बार मथुरा जाकर भी आ चुकी हूं, वहां से जन्मभूमि से लड्डू गोपाल खरीदकर पूजा करवाकर लाई हूं। घर में तीनों टाइम नहाकर..उनका भोग लगाकर जूठा खाती हूं..फिर खाना खाती हूं।'
किशोर जोशी
किशोर जोशी author

राजनीति में विशेष दिलचस्पी रखने वाले किशोर जोशी को और खेल के साथ-साथ संगीत से भी विशेष लगाव है। यह टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल में नेशनल डेस्क पर कार्यरत ... और देखें

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