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बेटियों को मिल सके संपत्ति का हक, इसलिए केरल का मुस्लिम दंपति 29 साल बाद दोबारा कर रहा शादी

  • Written by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Mar 7, 2023, 12:42 PM IST

केरल का दंपति शरीयत की कुछ खास शर्तों के कारण दोबारा शादी कर रहा है। इसकी वजह है मुस्लिम विरासत कानून और संपत्ति का बंटवारा। समझिए पूरा मामला।

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केरल का मुस्लिम दंपति 29 साल बाद स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत दोबारा कर रहा शादी (प्रतीकात्मक)

Photo : iStock

Muslim Couple In Kerala To Remarry: केरल के कासरगोड जिले में एक मुस्लिम जोड़ा 29 साल बाद दोबारा शादी करने जा रहा है। इसकी वजह जानकर आपको हैरानी होगी और हौसला भी बढ़ेगा। यह दंपति अपनी तीन बेटियों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act) के तहत फिर से शादी करने जा रहा है। वकील और अभिनेता सी शुक्कुर, जिन्हें कुंचाको बोबन स्टारर 'नना थान केस कोडू' (फिर मुझ पर मुकदमा करो) में एक वकील की भूमिका के लिए जाना जाता है। वह अपनी पत्नी शीना से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 8 मार्च को दोबारा शादी करने जा रहे हैं।

मुस्लिम विरासत कानून के चलते लिया फैसला

पश्चिमी देशों में और कुछ हिंदू जोड़े अक्सर वैवाहिक जीवन में नई ताजगी लाने के लिए कई साल के बाद अपने जीवनसाथी से दोबारा शादी करते हैं। लेकिन केरल का दंपति शरीयत के कुछ खास शर्तों के कारण अपनी शादी को फिर से पंजीकृत करने के लिए शादी कर रहा है। इसकी वजह है मुस्लिम विरासत कानून और संपत्ति का बंटवारा। इन कानूनों में कहा गया है कि बेटियों को अपने पिता की संपत्ति का केवल दो-तिहाई हिस्सा मिलेगा और कोई बेटा नहीं हने पर संपत्ति पिता के भाइयों के पास चली जाएगी।

शादी को 29 साल हो चुके हैं

इस दंपति की शादी को 29 साल हो चुके हैं। वे एसएमए के तहत अपनी शादी को फिर से पंजीकृत कराकर इसे बदलने की उम्मीद कर रहे हैं। एक फेसबुक पोस्ट में शुक्कुर ने कहा कि अतीत में वह दो बार मौत के करीब से होकर गुजरे जिसके बाद उन्हें सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि वह अपनी बेटियों के लिए क्या छोड़कर जा रहे हैं। क्या बेटियां उनकी सारी बचत और संपत्ति की हकदार होंगी। उनकी चिंता यह थी कि 1937 के मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट और अदालतों द्वारा लिए गए फैसलों के अनुसार, कोई पुरुष संतान नहीं होने पर पिता की संपत्ति का केवल दो-तिहाई हिस्सा बेटियों के पास जाता है और बाकी पिता के भाइयों को मिल जाती है।

बेटियों के साथ लैंगिक भेदभाव होगा खत्म

उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि शरिया कानून के तहत वसीयत छोड़ने की अनुमति नहीं है। इसलिए कि बच्चे लड़कियों के रूप में पैदा हुए हैं, उन्हें इस तरह के लैंगिक भेदभाव का सामना करना पड़ेगा। शुक्कुर ने कहा कि इस हालात से बाहर निकलने का एकमात्र तरीका एसएमए के तहत शादी करना है। इसलिए उन्हें उम्मीद है कि उनका फैसला मुस्लिम परिवारों में बेटियों के साथ होने वाले लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने का रास्ता दिखाएगा और लड़कियों के आत्मविश्वास और सम्मान को बढ़ाने में मदद करेगा। एसएमए एक्ट के तहत शादी करने के बाद वह अपनी संपत्ति बेटियों के नाम कर सकेंगे।

अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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