देश

सैफ अली खान पर एक से अधिक लोगों ने किया था हमला! मुंबई पुलिस ने किया बड़ा खुलासा

Saif Ali Khan Attack Case: क्या अभिनेता सैफ अली खान पर उनके घर में घुसकर चाकू से हुए हमले में एक से अधिक लोग शामिल थे? ये सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि मुंबई पुलिस को सैफ पर हमले की वारदात में एक से अधिक लोगों के शामिल होने का संदेह है। आपको बताते हैं कि ये नया माजरा क्या है।

Image

सैफ अली खान पर हुए हमले के मामले में आया बड़ा अपडेट।

Mumbai: मुंबई पुलिस को संदेह है कि अभिनेता सैफ अली खान पर चाकू से हमले की वारदात में एक से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। इस मामले में 30 वर्षीय एक बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने अपराध में और लोगों की संलिप्तता के संदेह का हवाला देते हुए गिरफ्तार आरोपी की हिरासत का अनुरोध किया था।

हमले की वारदात में एक से अधिक लोगों के शामिल होने का संदेह

अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने 16 जनवरी को बांद्रा में अभिनेता के घर पर हुए हमले के बाद खान और उनके कर्मचारियों के रक्त के नमूने व कपड़े एकत्र किए और उन्हें जांच के लिए फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिया है। पुलिस ने हमले के आरोप में 19 जनवरी को पड़ोसी ठाणे शहर से बांग्लादेशी नागरिक शरीफुल इस्लाम शहजाद मोहम्मद रोहिल्ला अमीन फाकिर उर्फ विजय दास को गिरफ्तार किया था। शुक्रवार को एक अदालत ने शरीफुल की पुलिस हिरासत 29 जनवरी तक बढ़ा दी।

अपार्टमेंट से एकत्र किए गए फिंगरप्रिंट से मिले आरोपी के फिंगरप्रिंट

अधिकारी ने कहा कि आरोपी जांच टीम के साथ सहयोग नहीं कर रहा और उसने अभी तक यह नहीं बताया है कि उसने अपराध में इस्तेमाल किया गया चाकू कहां से खरीदा था। उन्होंने कहा कि अभिनेता और आरोपी के खून के नमूने व कपड़े एफएसएल को भेजे गए हैं, ताकि पता लगाया जा सके कि आरोपी के कपड़ों पर लगा खून खान का था या नहीं। उन्होंने कहा कि खान के अपार्टमेंट से एकत्र किए गए फिंगरप्रिंट आरोपी के फिंगरप्रिंट से मेल खाते हैं।

शुक्रवार को खान ने मुंबई पुलिस के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया, जिसमें उन्होंने कहा कि आरोपी ने एक करोड़ रुपये की मांग की और घरेलू सहायिका पर हमला किया, और जब उन्होंने उसे रोकने की कोशिश की, तो हमलावर उन पर कई बार चाकू से वार करके भाग निकला। खान (54) को पिछले सप्ताह हुए हमले के बाद लीलावती अस्पताल में आपातकालीन सर्जरी करानी पड़ी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article