GOBARdhan Scheme: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। एलएनजी (LNG) जैसे महंगे ईंधन के आयात पर देश की निर्भरता कम करने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'गोबरधन योजना' को एक व्यापक और नए ढांचे के साथ मंजूरी दी है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार का लक्ष्य अगले 10 सालों में देश के भीतर कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन 10 गुना तक बढ़ाना है। भारत में कृषि अवशेष (बायोमास) और पशुधन से मिलने वाला गोबर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। इन जैविक अपशिष्टों का सही इस्तेमाल करके देश में ही बड़े पैमाने पर गैस बनाई जा सकती है।
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योजना के छह प्रमुख स्तंभ
- बिक्री की गारंटी (Assured Offtake): बायोगैस उत्पादकों को अब अपने उत्पाद को बेचने की चिंता नहीं होगी, सरकार इसकी खरीद सुनिश्चित करेगी।
- कीमतों में स्थिरता (Price Stability): वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस के उतार-चढ़ाव से उत्पादकों को बचाने के लिए एक निश्चित मूल्य तय किया जाएगा।
- कैपेक्स सहायता (Capex Support): प्लांट लगाने की लागत कम करने के लिए प्रति टन प्रतिदिन (TPD) क्षमता वाले संयंत्र पर अधिकतम ₹2 करोड़ तक की वित्तीय मदद मिलेगी।
- पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर: तैयार गैस को उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुंचाने के लिए इसे देश के सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) और पीएनजी (PNG) नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
- क्रेडिट गारंटी (Credit Guarantee): एमएसएमई (MSMEs) और महिला उद्यमियों को आसानी से लोन दिलाने के लिए 85% तक की क्रेडिट गारंटी दी जाएगी।
- नवाचार (Innovation): नई तकनीकों और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए 'चैलेंज फंड' की व्यवस्था की गई है। यह कदम न केवल पर्यावरण को बचाने और कचरे का सही प्रबंधन करने में मददगार साबित होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और एमएसएमई सेक्टर को भी एक नई दिशा देगा।
