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धारावी में अवैध मस्जिद गिराने पहुंचा BMC का बुलडोजर, लोगों ने टीम को घेरा; पुलिस तैनात

Mumbai News:बीएमसी अधिकारियों का एक दल सुबह करीब नौ बजे धारावी के 90 फुट रोड पर स्थित महबूब-ए-सुब्हानी मस्जिद के कथित अवैध हिस्से को गिराने के लिए पहुंचा था। जैसे ही लोगों को यह पता लगा, भारी संख्या में लोग इकट्ठे हो गए और सड़क पर बैठ गए।

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धारावी में मस्जिद गिराने का विरोध।

Photo : IANS

Mumbai News: मुंबई की धारावी झुग्गी बस्ती में शनिवार को उस समय तनाव व्याप्त हो गया जब सैकड़ों लोग एक मस्जिद के कथित अवैध हिस्से को गिराने की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की योजना के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि इलाके में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

पुलिस अधिकारी ने कहा, जी-उत्तर प्रशासनिक वार्ड से बीएमसी अधिकारियों का एक दल सुबह करीब नौ बजे धारावी के 90 फुट रोड पर स्थित महबूब-ए-सुब्हानी मस्जिद के कथित अवैध हिस्से को गिराने के लिए पहुंचा था। वहां जल्द ही बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी एकत्र हो गए। उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को उस गली में जाने से रोक दिया जहां मस्जिद स्थित है।

भारी पुलिसबल किया गया तैनात

उन्होंने कहा, 'उसके बाद सैकड़ों लोग धारावी थाने के बाहर इकट्ठा हो गए और नगर निगम के कदम का विरोध करने के लिए सड़क पर बैठ गए। अधिकारी ने बताया कि इलाके में भारी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है और स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि मस्जिद का एक प्रतिनिधिमंडल, बीएमसी अधिकारी और धारावी पुलिस इस मुद्दे को सुलझाने के लिए बातचीत कर रहे हैं। घनी आबादी वाले धारावी को एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती माना जाता है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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