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भारत में मिला एमपॉक्स का संदिग्ध मरीज, किया गया आइसोलेट; स्वास्थ्य मंत्रालय अलर्ट

Mpox Cases in India: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि पीड़ित व्यक्ति ने ऐसे देश की यात्रा की है जहां एमपॉक्स के मामले बढ़ रहे हैं। उसे आइसोलेट कर दिया गया है और मामले की पुष्टि के लिए उसके नमूनों का परीक्षण किया जा रहा है।

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भारत में एक व्यक्ति में मिले एमपॉक्स के लक्षण।

Photo : BCCL

Mpox Cases in India: दुनिया में एमपॉक्स तेजी से फैल रहा है। अफ्रीका के बाद यह वायरस यूरोपीय देशों में भी अपने पैर पसार रहा है, जिसे लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने अलर्ट जारी किया है। इस बीच भारत में एमपॉक्स का एक संदिग्ध मरीज मिला है, जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय अलर्ट हो गया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि संदिग्ध रोगी ने ऐसे देश की यात्रा की है, जहां एमपॉक्स तेजी से फैल रहा है। ऐहितयातन उसे आइसोलेट कर दिया गया है और अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मामले की पुष्टि के लिए उसके सैंपल की जांच की जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि उसके लक्षण एनसीडीसी द्वारा पहले से बताए गए लक्षणों के अनुरूप ही हैं और किसी भी अनावश्यक चिंता का कोई बात नहीं है। मंत्रालय ने बताया कि पीड़ित रोगी को अस्पताल में रखा गया है और उसकी हालत स्थिर बनी हुई है। इस मामले की जांच दिल्ली में या फिर किसी और शहर में चल रही है इस बात की जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से नहीं दी गई है।

तेजी से बढ़ रहे एमपॉक्स के मामले

एमपॉक्स के मामले दुनिया में तेजी से बढ़ रहे हैं। अफ्रीका में यह तेजी से फैल रहा है और वयस्कों और बच्चों दोनों को संक्रमित कर रहा है। इससे विशेषकर बच्चों की मृत्यु भी बढ़ रही है, जिससे वायुजनित होने की चिंता बढ़ रही है। अफ्रीका के बाहर, एमपॉक्स का क्लेड 1बी स्वीडन और थाईलैंड में भी फैल चुका है, जहां अब तक एक-एक मामला सामने आया है। इसके बाद एमपॉक्स को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया है।

हवा के माध्यम से नहीं फैला एमपॉक्स: रिपोर्ट

वैश्विक स्तर पर एमपॉक्स के प्रकोप के बीच, यूएस सीडीसी की एक रिपोर्ट से पता चला है कि कोविड-19 के विपरीत, मंकीपॉक्स वायरस (एमपीएक्सवी) आसानी से हवा के माध्यम से नहीं फैलता। सीडीसी की नवीनतम 'रुग्णता और मृत्यु दर' साप्ताहिक रिपोर्ट में एमपीओएक्स वाले 113 व्यक्तियों पर एक अध्ययन शामिल था, जिन्होंने 2021-22 के दौरान 221 उड़ानों में यात्रा की थी। नतीजों से पता चला कि 1,046 यात्रियों में से कोई भी संक्रमित नहीं हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है, अमेरिकी सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा 1,046 यात्री संपर्कों पर नजर रखने के बाद, सीडीसी ने किसी दूसरे मामले की पहचान नहीं की। निष्कर्षों से पता चलता है कि एमपॉक्स से पीड़ित व्यक्ति के साथ हवाई यात्रा करने से संक्रमण का खतरा नहीं होता है, या नियमित संपर्क ट्रेसिंग गतिविधियों की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, सीडीसी ने सिफारिश की है कि एमपॉक्स संक्रमण वाले लोगों को अलग-थलग रहना चाहिए और तब तक यात्रा में देरी करनी चाहिए जब तक कि वह संक्रामक व्यक्ति अलग न हो जाए।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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