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PFI जैसे देश में 50 से ज्यादा संगठन प्रतिबंधित, ऐसे कसती है नकेल

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  • Updated Sep 28, 2022, 01:51 PM IST

केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से मंगलवार देर रात जारी एक अधिसूचना के अनुसार, पीएफआई के कुछ संस्थापक सदस्य स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) के नेता हैं । और पीएफआई के तार जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) से भी जुड़े हैं। जेएमबी और सिमी दोनों ही प्रतिबंधित संगठन हैं। पीएफआई के इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) जैसे आतंकवादी संगठनों के साथ संबंधों के भी कई मामले सामने आए हैं।

KEY HIGHLIGHTS
  • बब्बर खालसा इंटरनेशनल, खालिस्तान कमांडो फोर्स, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन पहले से प्रतिबंधित हैं।
  • सेक्शन-3 के तहत 13 संगठन प्रतिबंधित हैं। जिसमें सिमी, उल्फा (ULFA), LTTE जैसे आतंकी संगठन शामिल हैं।
  • पीएफआई पर प्रतिबंध के बाद, उसे विदेश और भारत से मिलने वाली फंडिंग पर रोक लगेगी।

PFI Ban In India: भारत सरकार ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार के अनुसार PFI आतंकी गतिविधियों में शामिल है और उसके ISIS जैसे आतंकपादी संगठनों से संबंध है। इसे देखते हुए उस पर प्रतिबंध (PFI Ban) लगाया गया है। सरकार ने पीएफआई के अलावा उससे संबंधित रिहैब इंडिया फाउंडेशन,कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया इमाम काउंसिल, नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन, नेशनल विमेंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पॉवर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन (केरल) पर भी प्रतिबंध लगाया है। इन सभी संगठनों पर 5 साल का प्रतिबंध लगाया गया है।

पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने के बाद सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। एसडीपीआई के अध्यक्ष एम.के फैजी ने कहा है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का यह फैसला सीधे तौर पर लोकतंत्र और भारतीय संविधान में निहित लोगों के अधिकार पर हमला है। हालांकि पीएफआई को पहला संगठन नहीं है कि जिसे आतंकी गतिविधियों में शामिल होने और राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए प्रतिबंधित किया गया है। सरकार के तरफ से ऐसे 55 संगठनों को पहले ही प्रतिबंधित किया जा चुका है।

गृह मंत्रालय ने क्या कहा

केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से मंगलवार देर रात जारी एक अधिसूचना के अनुसार, पीएफआई के कुछ संस्थापक सदस्य स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) के नेता हैं । और पीएफआई के तार जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) से भी जुड़े हैं। जेएमबी और सिमी दोनों ही प्रतिबंधित संगठन हैं।अधिसूचना में कहा गया है कि पीएफआई के इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) जैसे आतंकवादी संगठनों के साथ संबंधों के भी कई मामले सामने आए हैं। इसके अलावा यह भी दावा किया गया कि पीएफआई और उसके सहयोगी या मोर्चे देश में असुरक्षा होने की भावना फैलाकर एक समुदाय में कट्टरता को बढ़ाने के वास्ते गुप्त रूप से काम कर रहे हैं, जिसकी पुष्टि इस तथ्य से होती है कि पीएफआई के कुछ कार्यकर्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए हैं।

ये 52 संगठन भी प्रतिबंधित

गृह मंत्रालय इस तरह की गतिविधियों में लिप्त आतंकी संगठनों को 2 कैटेगरी के तहत प्रतिबंधित करता है। गैर कानूनी गतिविधि निरोधी कानून-1967 के तहत 42 आतंकी संगठनों को प्रतिबंधित किया गया है। जिसमें बब्बर खालसा इंटरनेशनल, खालिस्तान कमांडो फोर्स, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन शामिल है। जबकि गैर कानूनी गतिविधि निरोधी कानून-1967 के सेक्शन-3 के तहत 13 संगठन शामिल हैं। जिसमें सिमी, उल्फा (ULFA), LTTE जैसे आतंकी संगठन शामिल हैं।

क्रम.संख्यासेक्शन-3 के तहत प्रतिबंधित आतंकी संगठन
1स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI)
2यूनाइटेड लिब्रेशन फ्रंट ऑफ असोम (ULFA)
3NDFB
4Meitei Extremist Organization
5ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (ATTF)
6नेशल लिब्रेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (NLFT)
7Hyruiiewtrep National Liberation Council (HNLC)
8लिब्रेशन टाइगर ऑफ तमिल ईलम (LTTE)
9NSICN (खपलांग)
10इस्मलामिक रिसर्च फाउंडेशन
11जमात-ए-इस्लामी (जम्मू और कश्मीर)
12जम्मू एंड कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट (यासीन मलिक गुट)
13सिख फॉर जस्टिस (SFJ)
स्रोत: गृह मंत्रालय वेबसाइट

प्रतिबंध लगने से पीएफआई को क्या होगा नुकसान

प्रतिबंध लगने के बाद पीएफआई को अब एक आतंकवादी संगठन माना जाएगा। ऐसे में उसको विदेश और भारत से मिलने वाली फंडिंग पर रोक लगेगी। साथ ही संगठन से साथ जुड़ने, उसकी भर्ती प्रक्रिया में कोई शामिल नहीं हो सकेगा। इसके प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े किसी भी व्यक्ति को आतंकी आरोपों के आधार पर गिरफ्तार किया जा सकेगा। पीएफआई और उसके पदाधिकारी धरना प्रदर्शन, विरोध, सेमिनार, सम्मेलन आदिन नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा संबंधित संगठनों के बैंक खाते, संपत्ति और कार्यालय जब्त किए जा सकेंगे। साथ ही उसके पदाधिकारियों के लिए यात्रा पर भी रोक लगाई जा सकेगी।

क्या है पीएफआई

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया को एक इस्लामिक संगठन के नाम से रजिटर्ड किया गया था। ये संगठन खुद को पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हक में आवाज उठाने वाला बताता है। इसका गठन साल 2007 में नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (NDF)के उत्तराधिकारी के रूप में हुई। इसके पहले वर्ष 2006 में तीन मुस्लिम संगठन राष्ट्रीय विकास मोर्चा, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु की मनिथा नीति पासारी का विलय हुआ । और उसके बाद PFI अस्तित्व में आया । इसका मुख्यालय दिल्ली में है। दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद दक्षिण में इस तरह के कई संगठन सामने आए थे। उनमें से कुछ संगठनों को मिलाकर पीएफआई का गठन किया गया। पीएफआई का दावा है कि उसकी देश के 22 राज्यों में इकाइयां है।

अन्य 42 प्रतिबंधित संगठनों की देंखे लिस्ट

BANNED ORGANISATION

देखें प्रतिबंधित संगठनों की लिस्ट

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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