राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत अपने अमेरिका दौरे के बाद कनाडा के टोरंटो पहुंच चुके हैं। संघ सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका में कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भागवत टोरंटो के लिए रवाना हुए। कनाडा प्रवास के दौरान उनका एक कम्युनिटी प्रोग्राम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें भारतीय मूल के साथ-साथ कनाडाई मूल के विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोगों के शामिल होने की संभावना है।
संघ प्रमुख कनाडा में करीब दो दिन रहेंगे। इसके बाद वह 2 से 7 सितंबर तक ब्रिटेन के दौरे पर रहेंगे। लंदन प्रवास के दौरान प्रवासी भारतीयों से मुलाकात के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ अंतरधार्मिक संवाद का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।
यहूदी, ईसाई और सिख समुदायों के प्रतिनिधियों से मुलाकात
सूत्रों के मुताबिक, मोहन भागवत ब्रिटेन में अलग-अलग धर्मों से जुड़े प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में यहूदी, ईसाई और सिख समुदायों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इन संवादों में मौजूदा वैश्विक और सामाजिक घटनाक्रमों के अलावा RSS की ओर से चलाए जा रहे विभिन्न सामाजिक अभियानों पर भी चर्चा हो सकती है। संघ का जोर विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच संवाद, सामाजिक समरसता और आपसी सहयोग बढ़ाने पर रहने की संभावना है।
मतांतरण और ‘लव जिहाद’ जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की संभावना
सूत्रों के मुताबिक, भारत में सामने आने वाले मतांतरण और ‘लव जिहाद’ से जुड़े विवादों पर भी इन बैठकों में चर्चा हो सकती है। संघ से जुड़े लोगों का मानना है कि इन मुद्दों के कुछ मामलों में विदेशी संगठनों या विदेश से जुड़े नेटवर्क की भूमिका के आरोप सामने आते रहे हैं। भागवत इन मुद्दों पर विभिन्न धार्मिक प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर सकते हैं और यह जानने की कोशिश हो सकती है कि धार्मिक एवं सामाजिक स्तर पर ऐसे विवादों से कैसे निपटा जाए तथा समुदायों के बीच विश्वास और संवाद को कैसे मजबूत किया जाए।
हालांकि, इन विषयों पर चर्चा का केंद्र सामाजिक जागरूकता, संवाद और आपसी समन्वय रहने की संभावना है। किसी समुदाय को सामूहिक रूप से इन मुद्दों से जोड़ने के बजाय संबंधित मामलों और उनके सामाजिक प्रभाव पर बातचीत किए जाने की संभावना है।
विदेशों में संवाद बढ़ाने की RSS की रणनीति
मोहन भागवत का कनाडा और ब्रिटेन दौरा RSS की विदेशों में संपर्क और संवाद बढ़ाने की रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संघ अब प्रवासी भारतीयों के साथ संवाद के अलावा स्थानीय समाज और विभिन्न धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधियों तक भी अपनी पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रहा है। संघ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस तरह के संवादों का उद्देश्य RSS को लेकर मौजूद धारणाओं और गलतफहमियों को दूर करना तथा संघ के विचार, सामाजिक अभियानों और भारत से जुड़े मुद्दों पर अपना दृष्टिकोण सीधे लोगों तक पहुंचाना है।
ब्रिटेन में होने वाली बैठकों के दौरान वैश्विक घटनाक्रम, भारतीय समुदाय से जुड़े मुद्दे, धार्मिक-सामाजिक समरसता और भारत के सामने मौजूद समकालीन चुनौतियां चर्चा के प्रमुख विषय हो सकते हैं।
