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'सरकार ने हिंदुस्तान को चक्रव्यूह में फंसाया', अभिमन्यु का उदाहरण देकर ये क्या बोल गए राहुल गांधी

Lok Sabha: राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए ये दावा किया है कि सरकार ने अभिमन्यु की तरह हिंदुस्तान को चक्रव्यूह में फंसाया है। उन्होंने कहा कि चक्रव्यूह में छह लोगों ने घेर कर अभिमन्यु को मारा था। आज भी चक्रव्यूह रचने वाले छह लोग हैं। राहुल ने किन छह लोगों का नाम लिया नीचे पढ़ें।

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राहुल गांधी ने चक्रव्यूह का जिक्र करके सरकार को जमकर कोसा।

Rahul Gandhi on Chakravyuh: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बजट पर चर्चा के दौरान केंद्र की मोदी सरकार पर ये आरोप लगाया कि उसने हिंदुस्तान के युवाओं, किसानों और गरीबों को अभिमन्यु की तरह चक्रव्यूह में फंसा दिया है। उन्होंने ये दावा किया अभिमन्यु के वक्त भी छह लोगों ने मिलकर चक्रव्यूह रचा था और आज भी छह लोगों ने मिलकर इसमें हिंदुस्तान को फंसाया है।

संसद राहुल गांधी ने बार-बार चक्रव्यूह का किया जिक्र

राहुल ने लोकसभा में केंद्रीय बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए यह भी कहा कि सत्तापक्ष चक्रव्यूह बनाता है, लेकिन कांग्रेस पार्टी एवं विपक्ष चक्रव्यूह तोड़ता है। राहुल गांधी ने कहा, 'हजारों साल पहले अभिमन्यु को चक्रव्यूह में छह लोगों ने फंसा कर मारा था...चक्रव्यूह का दूसरा नाम है- ‘पद्मव्यूह’, जो कमल के फूल के आकार का होता है। इसके अंदर डर और हिंसा होती है।'

पीएम मोदी, अमित शाह के अलावा चार अन्य को घेरा

कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के अलावा चार और लोगों का नाम लिया, जिस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आपत्ति जताई। विपक्ष के नेता ने कहा कि अजित डोवल, अंबानी, अडानी और मोहन भागवत का नाम लिया जिसके बाद लोकसभा स्पीकर ने उन्हें तुरंत रोक दिया। राहुल के बयान को लेकर स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि सदन में जो लोग नही हैं उनका नाम लेना नियम के विरुद्ध है।

'उसी तरह हिंदुस्तान को चक्रव्यूह में फंसा दिया गया'

राहुल गांधी ने दावा किया, '21वीं सदी में एक और चक्रव्यूह तैयार किया गया है... जो अभिमन्यु के साथ हुआ, वही हिंदुस्तान के साथ किया जा रहा है।' कांग्रेस नेता ने कहा, 'अभिमन्यु को चक्रव्यूह में छह लोगों ने घेर कर मारा था। आज भी चक्रव्यूह रचने वाले छह लोग हैं।' उन्होंने दावा किया कि जिस तरह से अभिमन्यु को चक्रव्यूह में फंसाया गया था उसी तरह हिंदुस्तान को फंसा दिया गया है।

'सेना के जवानों को अग्निपथ के चक्रव्यूह में फंसाया'

राहुल गांधी ने आरोप लगाया, 'सेना के जवानों को अग्निपथ के चक्रव्यूह में फंसाया गया। बजट में अग्निवीरों को पेंशन के लिए रुपया नहीं दिया गया।' उन्होंने कहा, 'अन्नदाता ने आपके चक्रव्यूह से निकलने के लिए आपसे सिर्फ एक चीज मांगी है कि एमएसपी की कानूनी गारंटी दे दीजिए, लेकिन नहीं दिया गया।'

कांग्रेस नेता ने कहा, 'एमएसपी की कानूनी गारंटी इतना बड़ा काम नहीं है। अगर बजट में इसका प्रावधान कर दिया जाता तो किसान चक्रव्यूह से निकल जाता। ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) गठबंधन की तरफ से मैं कहना चाहता हूं कि हम एमएसपी की कानूनी गारंटी देंगे।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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