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'मुसलमानों की संपत्तियां छीनना चाहती है सरकार...' वक्फ बोर्ड में संशोधन की खबरों पर भड़के ओवैसी

Waqf board amendment Bill: असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि मोदी सरकार वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता छीनना चाहती है। देश में कई दरगाह और मस्जिदें हैं, जिनके बारे में भाजपा-आरएसएस दावा करता है कि वे दरगाह और मस्जिदें नहीं हैं। मोदी सरकार इन संशोधन के जरिए मुसलमानों से उनकी संपत्तियां छीनना चाहती है।

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Asaduddin Owaisi

Photo : Twitter

Waqf board amendment Bill: वक्फ बोर्ड की शक्तियों को सीमित करने के लिए विधेयक पेश किए जाने संबंधी खबरों के बीच एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ओवैसी ने कहा है कि मोदी सरकार वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता छीनना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा शुरू से ही वक्फ बोर्ड और वक्फ संपत्तियों के खिलाफ रही है और उसने अपने हिंदुत्व एजेंडे के तहत वक्फ संपत्तियों तथा वक्फ बोर्ड को खत्म करने का प्रयास शुरू किया है।

ओवैसी ने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों के बारे में मीडिया में खबरें आ रही हैं, जिनसे पता चलता है कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता छीनना चाहती है। वह वक्फ संपत्ति के संचालन में हस्तक्षेप करना चाहती है। यह अपने आप में धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ है। उन्होंने कहा, यदि वक्फ बोर्ड की स्थापना और संरचना में कोई संशोधन किया जाता है, तो प्रशासनिक अराजकता पैदा होगी और वक्फ बोर्ड अपनी स्वायत्तता खो देगा।

मुसलमानों से संपत्तियां छीनना चाहती है सरकार

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, प्रस्तावित संशोधनों से संकेत मिलता है कि विवादित संपत्ति का सर्वेक्षण सरकारी अधिकारी करेंगे, न कि मामले का न्यायालय में निर्णय होगा। ओवैसी ने आरोप लगाया कि अगर सर्वेक्षण भाजपा नीत सरकार द्वारा किया जाता है, तो इसका नतीजा यह होगा कि संपत्ति वक्फ संपत्ति नहीं होगी। देश में कई दरगाह और मस्जिदें हैं, जिनके बारे में भाजपा-आरएसएस दावा करता है कि वे दरगाह और मस्जिदें नहीं हैं। उन्होंने कहा, कुल मिलाकर, अगर मीडिया की खबरें सच हैं, तो मोदी के नेतृत्व वाली सरकार मुसलमानों से वक्फ बोर्ड की संपत्तियां छीनना चाहती है। उन्होंने आगाह किया कि भाजपा के सहयोगियों को सोचना होगा कि क्या वे चाहते हैं कि मुसलमानों की वक्फ संपत्तियां छीन ली जाएं। ओवैसी ने कहा कि संसद सत्र चल रहा है, तो सरकार इस मामले की जानकारी मीडिया को दे रही है और संसद को नहीं दे रही, जो संसद की सर्वोच्चता के खिलाफ है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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