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Menstrual Leave: 'वर्कप्लेस पर पीरियड के दौरान महिलाओं को मिले छुट्टी...' याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई; नीति बना सकती है केंद्र सरकार

Periods Leave Policy in India: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को वर्कप्लेस से छुट्टी मिले या नहीं? इस मामले पर केंद्र सरकार को विचार कर नीति बनानी चाहिए। उन्होंने कहा, इसमें एक पहलू यह है कि हो सकता है कि 'पीरियड लीव' वजह से कंपनियां महिलाओं को नौकरी देने में आनाकानी करें।

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Menstrual Leave

Photo : iStock

Periods Leave in India: पीरियड्स (मासिक धर्म) के दौरान महिलाओं को छुट्टी मिले या नहीं? इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिका पर तुरंत आदेश देने से फिलहाल इंकार कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र सरकार को आदर्श नीति बनाने के लिए कहा है। बता दें, महिलाओं को पीरियड्स के दौरान अवकाश देने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।

याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि इस मामले में केंद्र को नीति बनाने पर विचार करना चाहिए। और यह देखना चाहिए कि 'पीरियड लीव' पर कोई आदर्श नीति बनाई जा सकती है या नहीं। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव के पास जाने को कहा। चीफ जस्टिस ने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव इस पर नीति बनाने से पहले केंद्र और राज्य सरकारों से सलाह मशविरा करें।

हो सकते हैं दो पहलू

मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान वर्कप्लेस से छुट्टी मिले या नहीं? इसके दो पहलू हो सकते हैं। पहला यह कि इस पर नीति आने से महिलाओं की नौकरी करने में भागीदारी बढ़ेगी ओर वर्कफोर्स में उनकी हिस्सेदारी भी बढ़ेगी। दूसरा- ऐसा भी हो सकता है कि इन छुट्टियों की वजह से लोग महिलाओं को नौकरी देने में आनाकानी करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे में सभी सरकारों को इस पर बातचीत करके पॉलिसी बनाने की ओर बढ़ना चाहिए।

(गौरव श्रीवास्तव इनपुट)

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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