Indian Navy: भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी (Admiral Dinesh K Tripathi) ने कहा है कि बदलते वैश्विक हालात और बढ़ती समुद्री चुनौतियों को देखते हुए भारत को अपनी नौसैनिक ताकत लगातार मजबूत करनी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा एक-दूसरे से सीधे जुड़ी हुई हैं। यदि समुद्री मार्ग सुरक्षित नहीं रहेंगे तो देश के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।
एक साक्षात्कार में एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि तीनों सेनाओं और तटरक्षक बल की क्षमताओं को एक साथ जोड़कर एक विशेष नौसैनिक थिएटर कमान बनाने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे समुद्री क्षेत्र में बेहतर समन्वय और तेज प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सकेगी।
विमानवाहक पोत की अहम भूमिका
तीसरे विमानवाहक पोत की जरूरत पर उन्होंने कहा कि विमानवाहक पोत किसी भी देश की समुद्री शक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक होता है। यह केवल युद्ध के समय ही नहीं, बल्कि रणनीतिक प्रभाव और समुद्री नियंत्रण बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विमानवाहक पोत युद्ध समूहों की तैनाती ने भारतीय नौसेना की ताकत को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया। इससे विरोधी पक्ष की नौसैनिक गतिविधियां सीमित करने में मदद मिली।
आधुनिक हेलीकॉप्टरों से बढ़ेगी ताकत
नौसेना प्रमुख ने अमेरिकी एमएच-60 रोमियो हेलीकॉप्टरों की खरीद पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुल 24 हेलीकॉप्टरों का ऑर्डर दिया गया था। इनमें से 15 हेलीकॉप्टर भारत पहुंच चुके हैं और कुछ अन्य जल्द मिलने वाले हैं। ये हेलीकॉप्टर समुद्र में निगरानी, पनडुब्बी रोधी अभियानों और कई अन्य महत्वपूर्ण मिशनों में उपयोगी साबित होंगे। उन्होंने कहा कि समुद्र में बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टर किसी भी नौसेना के लिए महत्वपूर्ण ताकत बढ़ाने वाले साधन होते हैं।
समुद्री डकैती के खिलाफ लगातार अभियान
समुद्री डकैती से निपटने के सवाल पर एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि यह समस्या केवल अस्थायी उपायों से खत्म नहीं हो सकती। इसके लिए लगातार निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। उन्होंने बताया कि भारतीय नौसेना वर्ष 2008 से अदन की खाड़ी में लगातार एक युद्धपोत तैनात रखे हुए है। इस दौरान हजारों व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान किया गया है। इससे भारत की एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार के रूप में पहचान मजबूत हुई है।
तेल आपूर्ति की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे क्षेत्रों में तनाव बढ़ने का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों के जरिए प्राप्त करता है। इसलिए नौसेना इन महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर लगातार निगरानी रखती है। इसके लिए समुद्री गश्त, हवाई निगरानी और विशेष मिशन आधारित तैनाती की जा रही है।
भविष्य की नौसेना होगी और अधिक आधुनिक
नौसेना प्रमुख ने कहा कि आने वाले समय में मानवरहित तकनीक युद्ध और सुरक्षा अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाली है। भारतीय नौसेना ड्रोन, मानवरहित समुद्री जहाजों और पानी के भीतर काम करने वाले स्वायत्त सिस्टम के उपयोग को तेजी से बढ़ा रही है। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीकों को भी शामिल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में नौसेना ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। ऑपरेशन सिंदूर और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े अभियानों ने नौसेना की क्षमता को साबित किया है। साथ ही आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया गया है। उनके अनुसार भारतीय नौसेना अब केवल विदेशी उपकरण खरीदने वाली नौसेना नहीं रही, बल्कि देश में निर्माण करने वाली मजबूत और आत्मनिर्भर नौसेना बन चुकी है।
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